दिल्ली में प्रदूषण रोज नए रिकॉर्ड तोड़ रही है। लोग दमघोंटू हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकारी एजेंसियां का रवैया कितना सुस्त है, इसका नजारा आज संसदीय समिति की बैठक में देखने को मिला। दर असल आज शहरी विकास मंत्रालय की संसदीय समिति की बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें एमसीडी, एनडीएमसी, डीडीए और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को शिरकत करनी थी। लेकिन बैठक में इन सभी एजेंसियों का एक भी वरिष्ठ अधिकारी नहीं पहुंचा। जिसके चलते बैठक को रद्द करना पड़ गया।
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बता दें कि अक्टूबर के अंत से ही दिल्ली में हवा जहरीली हो गई है। पंजाब और हरियाणा से जलाई जा रही पराली के चलते दिल्ली प्रदूषण की चादर में लिपटी हुई है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में सरकार को नोटिस भेज चुका है। लेकिन स्थिति ऐसी है जो सुधर नहीं रही है। ऐसे में प्रदूषण को रोकने के उपायों पर चर्चा के लिए संसदीय समिति ने एक उच्च स्तरीय बैठक आहूत की थी। इस बैठक में MCD, NDMC , DDA और केद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों को आना था।
लेकिन दिल्ली में प्रदूषण को लेकर बुलाई गई शहरी विकास मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिटी की बैठक में कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। तीनों MCD कमिश्नरों में से कोई नहीं पहुंचा। पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से डिप्टी सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी ही पहुंचे। डीडीए की तरफ से भी जूनियर अधिकारी ही आए। बडे अधिकारियो के ना पहुचने से बैठक टाल दी गई। संसदीय समिति के चेयरमैन जगदंबिका पाल लोकसभा के स्पीकर को पत्र लिखकर शिकायत करेंगे।