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आखिर रेल बजट को आम बजट में क्यों मिलाया, जानें...

 Written By: India TV News Desk
 Published : Sep 21, 2016 02:19 pm IST,  Updated : Sep 21, 2016 02:57 pm IST

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज रेल बजट को आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही बजट के विलय के प्रस्ताव को अपनी सहमति दे चुके थे।

Arun Jaitley- India TV Hindi
Arun Jaitley

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज रेल बजट को आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही बजट के विलय के प्रस्ताव को अपनी सहमति दे चुके थे। कैबिनेट की बैठक में प्रभु और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए के मित्तल भी शामिल हुए, जिससे वे इस ऐतिहासिक फैसले का हिस्सा बने। इस फैसले के बाद रेल बजट को अलग से पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हो जाएगी।

रेल संबंधी वित्तीय योजनाएं और खर्चे आदि संबंधी मामले आम बजट से 1924 में अलग कर दिए गए थे। अरुण जेटली ने इस बाबत प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आने वाले साल से आम बजट में ही रेल बजट पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विचार विमर्श के बाद इसकी तारीख पर फैसला लिया जाएगा।

अरुण जेटली ने कहा कि विकास के मसले पर रेलवे की भूमिका अलग नहीं है। बजट की प्रक्रिया 31 मार्च से पहले खत्म करने का विचार है। सरकार सैद्धांतिक तौर पर बजट की तारीख पहली करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने भी कहा है कि रेल बजट का आकार अब छोटा हो चुका है और आम बजट बड़ा होता गया है।

हालांकि अभी भी इसके लिए क्या प्रक्रिया होगी इसको भी तय किया जाना बाकी है और दोनो मंत्रालयों के अधिकारों का बटंवारा बाकी है। वित्त मंत्रालय ही अब रेल मंत्रालय का बजट तय करेगा। हालांकि वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच पेंशन की देनदारी, डिविडेंड, रेलवे को वित्त मंत्रालय से मिलने वाले ग्रॉस बजटीय सहायता और किराया तय करने का अधिकार जैसे मसलों पर अभी अतिम फैसला होना बाकी है। रेल बजट के आम बजट में विलय के बाद रेलवे को केंद्र सरकार को डिविडेंड का भुगतान भी नहीं करेगा।न वहीं रेल मंत्रालय किराया और माल भाड़ा तय करने के अधिकार अपने पास रखना चाहता है।

आज केंद्रीय कैबिनेट के सामने आम बजट पेश करने की तिथि भी पीछे करने का प्रस्ताव रखा गया। अब रेल बजट को आम बजट में मिला दिए जाने और बजट पेश करने की तिथि पहले करने के बाद अलग से विनियोग विधेयक और लेखानुदान पेश करने की आवश्यकता नहीं होगी।

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