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सचिन तेंदुलकर ने प.बंगाल में एक स्कूल भवन बनाने के लिए दिए 76 लाख रुपए

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 13, 2016 06:02 pm IST,  Updated : Jun 13, 2016 06:02 pm IST

कोलकाता से 150 किलोमीटर दूर पश्चिमी मिदनापुर जिले के एक गांव में एक स्कूल भवन का निर्माण हो रहा है क्रिकेटर-सांसद सचिन तेंदुलकर द्वारा दिए गए 76 लाख रुपए की मदद से। गोविन्दपुर-मकरानपुर स्वर्णमयी सासमल

school building being built by contribution from sachin...- India TV Hindi
school building being built by contribution from sachin tendulkar

कोलकाता से 150 किलोमीटर दूर पश्चिमी मिदनापुर जिले के एक गांव में एक स्कूल भवन का निर्माण हो रहा है क्रिकेटर-सांसद सचिन तेंदुलकर द्वारा दिए गए 76 लाख रुपए की मदद से। गोविन्दपुर-मकरानपुर स्वर्णमयी सासमल शिक्षानिकेतन नाम का ये स्कूल है - नेशनल हाइवे 60 के पास नारायणगढ के मकरामपुर में।

इस स्कूल के प्रधान सिक्षक उत्तम कुमार महंती ने अपने जर्जर स्कूल भवन की मरम्मत के लिए स्थानीय विधायक, सांसद, यहां तक कि जिला परिषद से भी गुजारिश की थी पर किसी ने मदद नहीं की। ये स्कूल पचास साल पुराना है, इमारत खस्ताहाल थी, छत से पानी टपकता था, क्लासरुम्स पर्याप्त संख्या में नहीं थे. करीब एक हजार छात्रों के लिए ठीक से बैठने तक का इन्तजाम नहीं था।

परेशान होकर हेडमास्टर साहब ने मार्च 2013 में सांसद सचिन तेन्दुलकर को एक पत्र लिखा। महंती को उम्मीद नहीं थी कि सचिन उनकी मदद करेंगे।

13 साल से मदद की गुहार लगा रहे थे

उत्तम बाबू 2003 में हेडमास्टर बन कर इस स्कूल में आए, और तब से सभी से मदद के लिए गुहार लगा रहे थे. उन्होंने कहा, ''मैं सचिन का फैन रहा हूं, मैंने सोचा क्यों न सचिन से मदद मांगूं, क्योंकि राज्य सभा का सांसद देश के किसी भी हिस्सेमें अपने एमपीलैड फंड से मदद भेज सकता है।''

एक साल उत्तम बाबू ने इंतजार किया। सचिन से कोई जवाब नहीं आया, आखिरकार 7 अगस्त 2014 को स्कूल के पते पर सचिन का पत्र आया। इसमें 76 लाख रुपए देने का वादा किया गया था।

Sachin letter
Sachin letter

2015-16 वित्त वर्ष में एमपीलैड फंड से नारायमगढ के इस स्कूल को सचिन ने 76 लाख 21 हजार रुपए दिए।  पैसे आने में कुछ समय लगा लेकिन सितम्बर 2015 में इस स्कूल को दो किस्तों में 57 लाख 15 हजार रुपए, यानी 75 प्रतिशत पैसे मिल गए। इस पैसे से स्कूल के लिए लाइब्रेरी बनी, एक्ज़ाम हॉल बना, छात्राओं के लिए क़ॉमन रुम बना।

एक बार सचिन से हाथ मिलाना चाहते हैं अब

उत्तम बाबू की अब एक ही ख्वाहिश बची है। ज़िन्दगी में कम से कम एक बार सचिन से मिलकर उनसे हाथ मिला लें। मैंने उनके पर्सनल  सेक्रेटरी को लिखा. पर्सनल सेक्रेटरी ने कहा कि सचिन बहुत व्यस्त हैं, शायद आ पाएं या नहीं, लेकिन सचिन ने ये कहला भेजा है कि वो नारायणगढ के इस स्कूल में भले ही आएं या नहीं, लेकिन स्कूल भवन के निर्माण को काम किसी भी कीमत पर रुकना नहीं चाहिए।

सचिन की इस मदद से स्कूल के सारे छात्र खुश हैं।

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