नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए 7 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक रोजाना 2,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए कहा। साथ ही कावेरी पर्यवेक्षी समिति को दोनों राज्यों के कावेरी बेसिन क्षेत्र का आकलन कर 17 अक्टूबर तक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।
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जस्टिस दीपक मिश्रा तथा न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने तमिलनाडु को 12 दिनों तक रोजाना 2,000 क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया। कर्नाटक ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने 30 सितम्बर के फैसले का पालन करते हुए तमिलनाडु को पानी देना शुरू कर दिया है और छह अक्टूबर तक वह 3100 करोड़ घन फीट पानी छोड़ चुका होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितम्बर को अपने आदेश में कर्नाटक को एक से छह अक्टूबर तक तमिलनाडु को रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने कहा कि पर्यवेक्षी समिति में केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, सदस्य तथा मुख्य अभियंता, कर्नाटक व तमिलनाडु के मुख्य सचिव या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि, राज्यों के मुख्य अभियंता या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि तथा केरल व पुदुच्चेरी के प्रतिनिधि होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार सुबह कर्नाटक से पूछा था कि वह कावेरी नदी का कितना पानी तमिलनाडु के साथ इस अवधि के दौरान साझा कर सकता है और इस बारे में न्यायालय को अपराह्न 3.15 तक अवगत कराने को कहा था, जिसके बाद यह आदेश आया।
कर्नाटक के वकील वी.एन.रघुपति को आधे घंटे का समय देते हुए कोर्ट ने मामले की सुनवाई मुल्तवी कर दी। सुनवाई दोबारा शुरू होने पर राज्य के महाधिवक्ता एम.आर.नायक ने न्यायालय से कहा कि वह प्रतिदिन 1,500 क्यूसेक पानी छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसा सरकार के उच्च स्तर से मिले निर्देश के आधार पर कह रहे हैं।