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कश्मीर में 8 महीने बाद खुले स्कूल, बच्चों ने हुर्रियत से पूछा- स्कूल जलाने से क्या मिला?

 Written By: India TV News Desk
 Published : Mar 01, 2017 09:37 pm IST,  Updated : Mar 01, 2017 09:51 pm IST

श्रीनगर: करीब 8 महीने बाद आज कश्मीर वैली में बच्चों के स्कूल खुल गए। आज कश्मीर के बच्चे स्कूल जाते दिखाई दिए। पिछले साल आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में माहौल खराब

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श्रीनगर: करीब 8 महीने बाद आज कश्मीर वैली में बच्चों के स्कूल खुल गए। आज कश्मीर के बच्चे स्कूल जाते दिखाई दिए। पिछले साल आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में माहौल खराब हुआ था। इसके बाद हुर्रियत ने बार-बार कैलेंडर जारी करके बंद की कॉल दी। सड़कों पर पत्थरबाजी हुई, स्कूल जलाए गए औ इस सब का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ा।

आज स्कूल खुलते ही बच्चों ने सबसे पहले हुर्रियत को जवाब दिया। हुर्रियत के लीडर्स का नाम लेकर छोटे-छोटे बच्चों ने कहा कि जो करना है करें लेकिन शिक्षा को सिय़ासत से दूर रखें। हुर्रियत के कैलेंडर्स से बच्चों का भविष्य खराब होता है।

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बच्चों ने पूछा, स्कूल जलाने से क्या मिला ?

आज हमारे चैनल इंडिया टीवी के संवाददाता ने श्रीनगर के अलग-अलग स्कूलों में जाकर बच्चों से बात की। बता दें कि पिछली बार दसवीं और बारहवीं को छोड़कर बाकी कक्षाओं के विद्यार्थियों को मास प्रमोशन दिया गया था यानी इन्हें बिना पेपर अगली क्लास में प्रमोट किया गया। आज बच्चों ने कहा कि बिना पढ़े.-बिना इम्तेहान दिए वो अगली क्लास में नहीं जाना चाहते। बच्चों ने हुर्रियत के नेताओं से कहा कि पत्थर से नही, पेन से बदलाव होता है। कलम चलेगी तो भविष्य सुरक्षित होगा।

'हुर्रियत सिर्फ अपने फायदे के लिए बच्चों का इस्तेमाल करती है'

कश्मीर के हालात पर आज केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, बच्चों और कश्मीर के लोगों को समझ आ गया है कि हुर्रियत सिर्फ अपने फायदे के लिए उनका इस्तेमाल करती है। अब कश्मीर में ऐसे लोगों की दाल नहीं गलेगी।

वैसे आतंकवादी और अलगाववादी एक ही बात कहते हैं कि कश्मीरी नौजवानों और कश्मीरी बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं लेकिन कश्मीर में बंद रखने से, दुकानों को बंद करवाने से क्या कश्मीरी व्यापारियों को फायदा होता है। स्कूलों पर ताला लगाने से, स्कूलों को जलाने से क्या कश्मीरी बच्चों का भला होता है। अजीब सी बात है जो हकीकत छोटे-छोटे बच्चों को समझ आ गई वो अलगावदी नहीं समझ रहे हैं। उम्मीद करनी चाहिए इन बच्चों की बातों का असर कश्मीर में बंद की कॉल देने वालों पर भी होगा।

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