नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अदृश्य जासूस गली-गली में घूम रहे हैं, जो काली कमाई वालों की पल-पल की जानकारी सीधे उन तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे अदृश्य जासूस देश भर में फैले हैं। आज प्रधानमंत्री ने भी माना है कि इन्हीं सीक्रेट एजेंट्स की बदौलत अबतक अरबों रुपए के कालेधन का खुलासा हुआ है।
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गली-गली में पीएम मोदी के 'अदृश्य' जासूस
अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में आज पीएम मोदी ने बताया, ‘आज आपलोग टीवी पर समाचार पत्रों में देखते होंगे रोज नए नए लोग पकड़े जा रहे हैं, नोटें पकड़ी जा रही है, छापे मारे जा रहे हैं। अच्छे-अच्छे लोग पकड़े जा रहे हैं, ये कैसे संभव हुआ है, मैं सीक्रेट बता दूं, सीक्रेट ये है कि जानकारियां मुझे लोगों की तरफ से मिल रही हैं।’
हर घर से खबरें आती हैं, हर गली, मोहल्ले और शहर से खबरें आती हैं। आम लोग ही मोदी के अदृश्य जासूस बन गए। अपने आसपड़ोस पर लोगों की चौकन्नी निगाहें ही सरकार को पहुंचा रही है कालेधन कुबेरों तक। जिन लोगों ने आम लोगों को लूट कर पैसे इकट्ठा किए अब उन्हें आम लोग ही कंगाल बना रहे हैं। बस एक फोन कॉल और काम तमाम... प्रधानमंत्री भी मानते हैं कि सरकारी एजेंसियों से जितनी खबरें नहीं मिलती उससे कई गुना ज्यादा ऐसी खबरें आम लोग भेज रहे हैं।
गद्दारों के पीछे पीएम के 'सीक्रेट एजेंट'
पीएम ने कहा, सरकारी व्यवस्था से जितनी जानकारी आती है उससे अनेक गुना ज्यादा सामान्य नागरिकों से जानकारियां आ रही हैं और ज्यादातर हमें सफलता मिल रही है वो जनसामान्य की जागरुकता के कारण मिल रही है। कोई कल्पना कर सकता है कि मेरे देश का जागरूक नागरिक ऐसे तत्वों को बेनकाब करने के लिए कितना रिस्क ले रहा है।
बता दें कि गली-गली में घूमते अपने अदृश्य जासूसों की बदौलत ही सरकार ने नोटबंदी के बाद से अबतक करीब साढ़े सात सौ से ज्यादा रेड और सर्च ऑपरेशन किए हैं। 22 दिसंबर तक हुई छापेमारियों में 3 हजार 651 करोड़ रुपये से ज्यादा की अघोषित आय का पता लग चुका है। आयकर विभाग ने दावा किया है कि अबतक करीब 100 करोड़ के नए नोट जब्त किये जा चुके हैं जबकि 433 के पुराने नोट भी जब्त किए जा चुके हैं। इनके अलावा करीब नब्बे करोड़ के गहने भी पकड़े गए हैं।
आम लोगों से मिल रहे इनपुट पर प्रधानमंत्री खुद कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कालेधन पर ऐक्शन की हर दिन की रिपोर्ट प्रधानमंत्री को भेजी जाती है। इसके लिए बाकायदा प्रधानमंत्री कार्यालय के एक ज्वाइंट सेक्रेट्री को कालेधन का नोडल ऑफिसर बनाया गया है। ये प्रधानमंत्री के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में हैं।
PMO में बनाया कंट्रोल रूम
आम लोगों के फोनकॉल और ईमेल को ट्रैक करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। इस कंट्रोल रूम में जब भी कोई फोन करता है तो उसकी सारी खुफिया जानकारी नोट कर ली जाती है फिर हर दो घंटे पर पीएमओ के ज्वाइंट सेक्रेट्री फोन और ईमेल से मिली खुफिया जानकारी की समीक्षा करते हैं। इसी बैठक में तय किया जाता है कि कौन-कौन सी इनफॉर्मेशन कार्रवाई के लायक है।
फिर आम लोगों से मिली खबरों को अलग-अलग विभागों को कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। अगर किसी ने खबर दी कि नोटों की खेप एक जगह से दूसरी जगह ले जायी जा रही है तो तुरंत लोकल पुलिस को निर्देश दिया जाता है कि वो कालेधन के उन कारोबारियों का पीछा करें और पकड़ें। अगर कोई ऐसी खबर मिलती है जिसमें नोटों को छुपा कर रखने का ठिकाना बताया गया हो तो फिर आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय को सतर्क कर दिया जाता फिर जांच एजेंसियां ट्रैप लगाती हैं। नजर रखती हैं और फिर सही मौका देख कर उन बड़ी मछलियों को धर दबोचती है।
बेईमानों को बर्बाद करेंगे 'जनता जेम्स बॉन्ड'
नोटबंदी के दौरान सरकार ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया था उस नंबर पर भी कालेधन से जुड़ी खबरें दी जा रही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा ऐसी सूचनाएं प्रधानमंत्री ऑफिस को ही लोग सीधा दे रहे हैं। सरकार ने कालेधन पर जानकारी देने के लिए एक ई मेल एड्रेस भी जारी किया था। खबर है कि इस पर एड्रेस पर अबतक दस हजार से ज्यादा ईमेल आ चुके हैं।
गली-गली में आम लोगों के जासूस बन जाने के पीछे एक बड़ी वजह है भरोसा। आम लोगों को इस बात का यकीन रहता है कि उनकी दी गयी जानकारी कभी लीक नहीं होगी और कार्रवाई जरूर होगी। उन्हें इस बात का भी भरोसा रहता है कि उनकी पहचान कभी जाहिर नहीं की जाएगी इसलिए खबरें देने में उन्हें कोई खतरा नहीं है। इसी विश्वास ने देश में हजारों लोगों की नजरों को मोदी का अदृश्य जासूस बना दिया है और यहीं नजरें बन गयी हैं कालाधन कुबेरों की सबसे बड़ी दुश्मन।
'अदृश्य' जासूस अब बताएंगे बेनामी संपत्ति का पता!
नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री की नजर है बेनामी जायदाद पर। नोटों की शक्ल में काली कमाई तो बाहर आ गयी, अब पीएम का मिशन है जमीन जायदाद में छुपे कालेधन को बेनकाब करने का। इस मुहिम में भी पीएम को चाहिए सीक्रेट एजेंट्स का साथ। प्रधानमंत्री की ये कोशिश भी तभी पूरी तरह कामयाब हो सकती है जब इसमें भी जनता जासूस बन जाए।
देखिए वीडियो-