नई दिल्ली: गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि केंद्र द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) दिल्ली और अन्य राज्यों में सिख विरोधी दंगों के 75 मामलों की पुन: जांच करेगा। पंजाब विधानसभा के अगले साल के शुरू में होने वाले चुनाव से कुछ महीनों पहले यह फैसला आया है। इन दंगों में कुल 3325 लोग मारे गए थे। अकेले दिल्ली में 2733 लोगों की जान चली गई थी। बाकी लोग उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में मारे गए थे।
दिल्ली पुलिस ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए 241 मामले बंद कर दिए थे। न्यायमूर्ति नानावती आयोग ने 241 में से केवल चार मामलों को फिर से खोलने की सिफारिश की थी लेकिन भाजपा अन्य सभी 237 मामलों की पुनर्जांच चाहती थी। सीबीआई ने केवल चार मामलों को फिर से खोला था और उनकी फिर से जांच की थी। उनमें से दो मामलों में इस जांच एजेंसी ने आरोपपत्र दायर किया था और एक मामले में पूर्व विधायक समेत पांच व्यक्ति दोषी ठहराए गए थे।
गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) जी पी माथुर समिति की सिफारिश के बाद 12 फरवरी, 2015 को एसआईटी गठित की गई थी। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तीन सदस्यीय इस एसआईटी में आईपीएस स्तर के दो महानिरीक्षक और एक न्यायिक अधिकारी है। करीब डेढ़ साल पहले एसआईटी के गठन के समय सरकार ने कहा था कि एसआईटी छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।
लेकिन यह ज्ञात नहीं है कि एसआईटी के काम में देरी क्यों हुई और अब सिख विरोध दंगों के केवल 75 मामलों की पुनर्जांच का निर्णय किया गया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने 10 दिसंबर, 2014 को 1984 के दंगे में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए पांच पांच लाख रुपए की अतिरिक्त मुआवजे की घोषणा की थी। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद सिख विरोधी दंगा फैला था। पिछले महीने गृह मंत्रालय ने घोषणा की थी कि दंगे से प्रभावित और विभिन्न राज्यों से पंजाब चले गए 1020 परिवारों को केंद्र प्रायोजित पुनर्वास योजना के तहत दो दो लाख रुपए दिए जाएंगे।