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श्रीनगर: CRPF के 8 जवानों को श्रद्धांजलि, जानिए कहानी पंपोर के उन परमवीरें की

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 26, 2016 05:20 pm IST,  Updated : Jun 26, 2016 05:28 pm IST

श्रीनगर: दक्षिण कश्मीर के पंपोर में शहीद हुए आठ जवानों आज श्रीनगर में आखिरी सलामी दी गई। शनिवार को श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था जिसमें CRPF

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श्रीनगर: दक्षिण कश्मीर के पंपोर में शहीद हुए आठ जवानों आज श्रीनगर में आखिरी सलामी दी गई। शनिवार को श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था जिसमें CRPF के 8 जवान शहीद हो गए। लेकिन जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने 2 आतंकियों को मार गिराया।

पंपोर के उन आठ परमवीरों की कहानी, जिन्होंने वतन की हिफाजत में अपनी जिंदगी न्यौछावर कर दी...

शहीद संतोष साव- औरंगाबाद के घर पर दुखों का जो पहाड़ टूटा है उसका कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता। घर का जवान बेटा संतोष कश्मीर में आतंकियों की गोली का शिकार हो गया। संतोष साव उन आठ जांबाजों में से एक थे जो पम्पोर में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए। औरंगाबाद के टेंगरा गांव में जैसे ही कॉन्स्टेबल संतोष की शहादत की खबर पहुंची परिवार पर जैसे गम का पहाड़ टूट पड़ा। घर के लोग आंसुओं के समंदर में डूब गए और बहन की तो रोते-रोते हिचकियां बंध गईं।

शहीद वीर सिंह- गम का यही आलम फिरोजाबाद के एक घर का भी है। पंपोर में शहीद हुए जवान वीर सिंह का घर है। जैसे ही शिकोहाबाद के नगला गांव में परिवार को सिपाही वीर के शहीद होने मनहूस खबर पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। 45 साल के वीर सिंह अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चे छोड़ गये हैं।

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शहीद सतीश- मेरठ के घर का जवान बेटा सतीश आतंकियों से लड़ते लड़ते शहीद हो गया। अब घर में सिर्फ सतीश की यादें बची हैं। पिता अखबार में छपी अपने शहीद बेटे की तस्वीर देखते हैं और बताते हैं अभी एक रोज पहले ही तो आवाज सुनी थी उसकी, सब कुछ ठीकठाक था और एक रात में ही दुनिया उजड़ गई।

शहीद संजय कुमार सिंह- जौनपुर के संजय कुमार सिंह के घर भी मातम का आलम है। रामपुर गांव के इन बुजुर्गों ने अपनी आंखों से संजय को बड़ा होते देखा था, फौजी बनते देखा था। आज जब संजय की शहादत की खबर आई तो बूढ़े पिता को ढांढस बंधाने के लिए गांव के बड़े बुजुर्ग इकट्ठा हो गए।

उदासी है, आंसू हैं, मातम है और चीखें हैं...यही हाल है उन सभी आठ घरों का जिन्होंने अपने जवान बेटे खो दिए। इन परिवारों की एक ही गुजारिश है जिन दहशतगर्दों ने इन्हें ये ग़म दिए हैं, उन्हें बक्शा नहीं जाना चाहिए और चुन-चुन कर उन आतंकियों का खात्मा होना चाहिए।

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