नई दिल्ली: राज्यसभा द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (GST) संविधान संशोधन विधेयक पारित होने के एक दिन बाद भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आज कहा कि वह अर्थशास्त्र के प्रति अपनी अध्ययनशील प्रतिबद्धता तथा पार्टी के प्रति वफादारी के बीच द्वंद्व के कारण वह इस कानून के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करने से बचेंगे।
उन्होंने आज ट्वीट किया, ‘क्या किसी किसी पीटी ने प्रस्तावित जीएसटी संविधान संशोधन में जीएसटीएन संभावनाओं और भूमिका का अध्ययन किया है।’ स्वामी पैट्रियोटिक ट्वीपल यानी ट्वीटर नेटवर्क पर सक्रिय देशभक्त लोगों के लिए संक्षिप्त में टीपी का प्रयोग करते हैं। जीएसटीएन से तात्पर्य वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क से है।
उनके एक ट्वीटर फॉलोअर ने जब उनसे पूछा कि उन्होंने जीएसटी तथा अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभाव के बारे में विचार क्यों नहीं व्यक्त किए हैं, स्वामी ने कहा, मैं चुप हूं क्योंकि अर्थशास्त्र के प्रति मेरी अध्ययनशील प्रतिबद्धता तथा पार्टी के प्रति वफादारी के बीच द्वंद्व है। उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि अर्थशास्त्री अभी तक सिर्फ यह जानते थे कि जीडीपी की वृद्धि दर बढ़ाने के लिए निवेश तथा पूंजी और श्रम उत्पादकता बढ़ाना जरूरी है।
वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली का मानना है कि जीएसटी के लागू होने से देश दुनिया का सबसे बड़ा एकल बाजार हो जाएगा और इससे जीडीपी वृद्धि दर दो प्रतिशत तक ऊंची हो सकती है।