भदोही (यूपी): रविवार की देर रात छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद सुलभ उपाध्याय का अंतिम संस्कार गोपीगंज के रामपुर गंगा घाट पर शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। सुलभ छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स में कॉन्स्टेबल थे। वे भदोही जिले के ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के बैराखास के रहनेवाले थे। परिजनों ने बताया कि सुलभ छुट्टी बिताकर चार मई को घर से ड्यूटी पर गये थे। रविवार की शाम भी सुलभ ने अपने पिता अशोक से बात कर परिजनों का हालचाल भी पूछा था। फिलहाल सुलभ की शादी की बात चल रही थी।
सुलभ उपाध्याय चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। छोटा बेटा होने से सुलभ माता मनोरमा देवी और पिता अशोक उपाध्याय के लाडले बेटे थे। बड़े भाई नीलेश व बड़ी बहनें निधी तथा बिसा भी सुलभ को जान से ज्यादा चाहते थे। मदर्स डे पर सुलभ ने मां मनोरमा से बात भी की थी। मां ने जब पूछा कि बेटा कब घर आओगे तो सुलभ ने कहा था, 'मम्मी मैं नक्सली आपरेशन में हूं। इस वक्त हमें सिर्फ अपना फर्ज ही दिख रहा है। नक्सलियों का सफाया कर जल्द ही घर लौटूंगा।' मां को शायद यह नहीं पता था कि हंस-हंस कर बात करने वाला उनका दुलारा बेटा सुलभ मातृत्व दिवस पर जिले भर की माताओं को फर्ज की रक्षा के लिए बेटों की शहादत का संदेश दे जाएगा।
शहीद जवान सुलभ का पार्थिव शरीर बैराखास गांव में पहुंचते ही हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। शहीद जवान के शव की एक झलक पाने को लोग बेताब दिखे। देर शाम गोपीगंज के रामपुर गंगा घाट पर शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। डीएम, एसपी ने पुष्प गुच्छ चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। पुलिसर्किमयों ने परम्परागत तरीके से अंतिम विदाई दी। पिता अशोक उपाध्याय ने मुखाग्नि दी तो सभी की आंखें भर आईं।