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न्यायालय ने राजस्थान के 36,000 निजी स्कूलों को छात्रों से 15 प्रतिशत कम शुल्क वसूलने को कहा

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 03, 2021 11:08 pm IST,  Updated : May 03, 2021 11:08 pm IST

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राजस्थान के 36,000 गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को सोमवार को निर्देश दिया कि वे शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए छात्रों से सालाना 15 प्रतिशत कम फीस वसूल करें। 

उच्चतम न्यायालय- India TV Hindi
उच्चतम न्यायालय Image Source : FILE PHOTO

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राजस्थान के 36,000 गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को सोमवार को निर्देश दिया कि वे शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए छात्रों से सालाना 15 प्रतिशत कम फीस वसूल करें। इसने स्पष्ट किया कि फीस का भुगतान न होने पर किसी भी छात्र को वर्चुअल या भौतिक रूप से कक्षा में शामिल होने से न रोका जाए और न ही उनका परिणाम रोका जाए।

शीर्ष अदालत ने राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा जिसमें राजस्थान विद्यालय (शुल्क नियमन) कानून 2016 और स्कूलों में फीस तय करने से संबंधित कानून के तहत बनाए गए नियम की वैधता को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया गया था। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने 128 पन्नों के अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए छात्रों या अभिभावकों द्वारा शुल्क का भुगतान छह बराबर किस्तों में किया जाएगा।

पीठ ने कहा कि इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि महामारी की वजह से लागू पूर्ण लॉकडाउन की वजह से एक अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसका व्यक्तियों, उद्यमों, उपक्रमों और राष्ट्र पर गंभीर असर पड़ा। न्यायमूर्ति खानविलकर ने फैसले में उल्लेख किया कि इस तरह के आर्थिक संकट में बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां चली गईं। फैसले में कहा गया, ‘‘अपीलकर्ता (स्कूल) अपने छात्रों से शैक्षणिक सत्र 2019-­20 के लिए 2016 के कानून के तहत निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप शुल्क वसूल करें, लेकिन शैक्षणिक सत्र 2020­-21 के लिए छात्रों द्वारा इस्तेमाल न की गईं सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 15 प्रतिशत कम फीस वसूल करें।’’

इसमें कहा गया कि संबंधित छात्रों द्वारा संबंधित राशि का भुगतान पांच अगस्त 2021 से पहले छह बराबर मासिक किस्तों में किया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि यदि स्कूल अपने छात्रों को और छूट देना चाहें तो दे सकते हैं। इसने स्पष्ट किया कि फीस/बकाया का भुगतान न होने पर किसी भी छात्र को वर्चुअल या भौतिक रूप से कक्षा में शामिल होने से न रोका जाए और न ही उनका परिणाम रोका जाए। 

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