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जगन्नाथ पुरी रथयात्रा को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, मंदिर कमेटी-राज्य और केंद्र के तालमेल से होगी यात्रा

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jun 22, 2020 04:20 pm IST,  Updated : Jun 22, 2020 06:16 pm IST

पुरी रथ यात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। मंदिर कमेटी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के आपसी तालमेल से रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। यात्रा का आयोजन लोगों की सेहत के साथ समझौता किए बिना किया जाएगा।

Jagganath Rath yatra- India TV Hindi
Representational Image Image Source : INDIA TV

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पुरी में होने वाली प्राचीन रथयात्रा को आयोजित करने की सशर्त इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रथयात्रा के आयोजन के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर जरूरी एहतियाती कदम उठाने होंगे। मंदिर कमेटी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के आपसी तालमेल से रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। यात्रा का आयोजन लोगों की सेहत के साथ समझौता किए बिना किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर राज्य सरकार को ऐसा लगता है कि स्थिति कंट्रोल में नहीं है तो वह रथ यात्रा को रोक भी सकती है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे ने पुरी रथ यात्रा के आयोजन को लेकर दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया था।

आपको बता दें कि शीर्ष अदालत ने अपने 18 जून के फैसले में कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के मद्देनजर पुरी में इस साल की ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पर रोक लगा दी थी। न्यायमू्र्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकीलों को बताया कि प्रधान न्यायाधीश उन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों के पीठ के गठन पर सहमत हैं जिनमें कुछ निश्चित शर्तों के साथ रथ यात्रा के आयोजन की अनुमति का अनुरोध किया गया है।

इस पीठ के समक्ष ही केंद्र ने मामले का उल्लेख किया और 18 जून के आदेश में सुधार का अनुरोध किया। इससे पहले, सुबह में केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के मद्देनजर इस साल लोगों की भागीदारी के बिना पुरी की ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को आयोजित करने की अनुमति दी जा सकती है। साथ ही कहा कि “सदियों की परंपरा को तोड़ा नहीं जा सकता।” ओडिशा सरकार ने भी शीर्ष अदालत में केंद्र के रुख का समर्थन किया।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामले का उल्लेख करते हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है। अगर भगवान जगन्नाथ को कल बाहर नहीं लाया गया तो परंपरा के मुताबिक उन्हें अगले 12 साल तक बाहर नहीं निकाला जा सकता है।”

मेहता ने कहा कि एहतियात बरतने के साथ ही राज्य सरकार एक दिन के लिए कर्फ्यू लगा सकती है। मेहता ने पीठ से कहा, “सभी ‘सेबायत’ और ‘पंडा”, जो कोविड-19 की जांच में संक्रमित नहीं पाए गए हैं, वे श्री शंकराचार्य के निर्णय के अनुरूप अनुष्ठानों में हिस्सा ले सकते हैं। लोग एकत्र न हों और वे लाइव प्रसारण के दौरान टीवी पर दर्शन कर सकते हैं। पुरी के राजा और मंदिर समिति इन अनुष्ठानों के प्रबंधों का पर्यवेक्षण कर सकती है।”

पुरी रथ यात्रा में दुनिया भर से लाखों लोग शामिल होते हैं और यह 23 जून से निर्धारित है। शीर्ष अदालत ने 18 जून को कहा था कि नागरिकों की सुरक्षा एवं जन स्वास्थ्य के हित में इस साल की रथ यात्रा को अनुमति नहीं दी जा सकती है और “अगर हम इसकी अनुमति देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।” आदेश पारित होने के एक दिन बाद ही इसे वापस लेने और इसमें संशोधन के अनुरोध को लेकर शीर्ष अदालत में कुछ आवेदन दाखिल किए गए।

With input from Bhasha

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