चेन्नई: केंद्र को कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन करने का निर्देश देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले को आज ऐतिहासिक बताते हुए तमिलनाडु के राजनीतिक दलों और किसानों ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि बिना देरी के बोर्ड का गठन किया जाए। कावेरी मामले में कानूनी कदम उठाने के लिए मुख्यमंत्री जयललिता की भी तारीफ की गई जिसके परिणामस्वरूप यह व्यवस्था आई।
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तमिलनाडु ऑल फॉर्मर्स फेडरेशन्स के अध्यक्ष पी आर पांडियान ने कहा, मैं तहेदिल से फैसले का स्वागत करता हूं। सारे किसान बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा, हम मुख्यमंत्री जयललिता द्वारा अपनाये गए कानूनी रास्ते के लिए उनका शुक्रिया अदा करते हैं, जिसकी वजह से शीर्ष अदालत का यह फैसला आया।
पांडियान के मुताबिक यह फैसला तमिलनाडु के किसानों द्वारा कई साल तक किये गए विरोध प्रदर्शनों, जिन्हें जनता के सभी वर्गों, राजनीतिक दलों और व्यापारियों का समर्थन था, के बाद भी आया है। उन्होंने कहा कि किसानों को अब भरोसा है कि कावेरी बोर्ड जरूरत को देखते हुए और बिना किसी राजनीतिक दखलंदाजी के पानी छोड़ने का आदेश देगा।
माकपा के किसान प्रकोष्ठ तमिलनाडु विवासायीगल संगम ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि बिना देरी के आदेश को लागू किया जाए और राज्य सरकार अतिरिक्त पानी की मात्रा पाने के प्रयास करे क्योंकि 6000 क्यूसेक पानी पर्याप्त नहीं होगा।
पीएमके अध्यक्ष रामदॉस ने कहा, तमिलनाडु को कल से 27 सितंबर तक कावेरी नदी का 6000 क्यूसेक पानी छोड़ने का उच्चतम न्यायालय का निर्देश पर्याप्त नहीं है, लेकिन सीएमबी गठित करने का फैसला ऐतिहासिक है और हम इसका पूरे दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस आदेश से लाखों किसानों को यह भरोसा मिला है कि अब तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा वाले जिलों में खेती करना संभव है।