देहरादून: उत्तराखंड में हुई भारी बारिश के चलते सारी नदियां ऊफान पर हैं। अलकनंदा का जलस्तर इतना बढ़ चुका है कि मकान और दुकान सब अपने साथ बहा कर ले जा रही है। सिर्फ चौबीस घंटे की बारिश में उत्तराखंड के सभी नदी और नाले बेकाबू होकर बहने लग गए हैं। 30 जून और 1 जुलाई की दरम्यानी रात तेज बारिश के बाद बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में प्रदेश में खास तौर पर पिथौरागढ़ और चमोली में व्यापक तबाही हुई थी।
शहर को जोड़ने वाली सारी सड़कें टूट गई है। बारिश और लैंडस्लाइड के कारण बद्रीनाथ का रास्ता भी बंद हो चुका है। यहां करीब 7 हजार श्रद्दालु फंस गए हैं। बद्रीनाथ को जोड़ने वाली सड़क का भी संपर्क टूट गया।
बादल फटने के बाद नंदप्रयाग घाट पर पानी इस कदर गिरा मानों आसमान से नदी निकल पड़ी थी। सड़कों का निशान तक मिट गया है। लैंडस्लाइड से दरकी हुई पहाड़ों पर से लोगों को निकाला जा रहा है। प्रशासन और सेना लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में लगी हुई है। रस्सियों के सहारे फंसे लोगों को निकालने की कोशिश हो रही है क्योंकि एक जगह से दूसरी जगह को जोड़ने वाली सड़कें बह चुकी है।
मौसम विभाग ने उत्तराखंड में अगले 3 दिनों तक बारिश की चेतावनी दी है।
सेना, राज्य पुलिस, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, राष्टीय आपदा रिस्पांस फोर्स (NDRF), राज्य आपदा रिस्पांस फोर्स (SDRF) के जवानों ने आज भी पिथौरागढ और चमोली के आपदा प्रभावित इलाकों में मलबा हटाने का काम जारी रखा। हालांकि, अभी तक कहीं से कोई और शव बरामद नहीं हुआ है तथा दोनों जिलों में मृतकों की संख्या 15 और लापता लोगों की संख्या 25 बनी हुई हैं।