कन्नौज: जमाना हाईटेक हो चुका है और दुनिया कहां से कहां जा रही है लेकिन यूपी की 20 करोड़ से ज्यादा आबादी की हिफाजत का जिम्मा संभाल रही पुलिस की हकीकत ये है कि अव्वल तो उसके पास ऐसे पुराने हथियार हैं, जो ठीक से चल भी नहीं पाते और हथियार अगर ठीक हैं तो पुलिसवाले इस काबिल नहीं हैं कि उन्हें चला सकें।
जिस पुलिस को बंदूक लोड करना भी नहीं आता हो, वो हमारी आपकी हिफाजत क्या करेगी, जिस पुलिस से गोलियां भी न चलती हों वो कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी क्या संभालेगी, जो पुलिस सिर्फ सौ मीटर दौड़ लगाने में हांफ जाती हो वो शातिर अपराधियों को क्या पकड़ेगी ? लेकिन हकीकत ये है कि देश का एक बहुत बड़ा सूबा ऐसी ही फिसड्डी पुलिस के भरोसे चल रहा है।
हथियार पहचानते तक नहीं
पुलिस के फिसड्डीपन की ये हैरान करने वाली घटना यूपी के कन्नौज की है। कानपुर जोन के आईजी जकी अहमद ने अचानक पुलिसवालों का टेस्ट ले लिया। आईजी साहब ने सबसे पहले तिर्वा के सीओ सुरेन्द्र पाल सिंह को एंटी रॉयट गन चलाकर दिखाने को कहा लेकिन वो गन उठाकर देखते रह गए
गुस्से में आईजी...कांपते सीओ साहब
छिबरामऊ सीओ वीपी सोलंकी से पूछा गया कि दंगा होगा तो कैसे कंट्रोल करेंगे लेकिन भारी भरकम वजन वाले सीओ साहब बंदूक उठाने के बाद उसे उलट पलट कर ऐसे देखने लगे जैसे कोई नायाब चीज उनके हाथ में आ गई हो। इसके बाद आईजी साहब ने सीओ सुरेंद्र पाल को आत्मरक्षा में गोली चलाकर दिखाने को कहा। रायफल उठाकर सुरेंद्र ना तो उसका बोल्ट खोल पाए और ना ही बुलेट लोड कर सके। सबकी पोल पट्टी समझने के बाद आईजी जकी अहमद ने कप्तान को इन अधिकारियों को ट्रेनिंग देने की हिदायत दी है
आईजी साहब की फिक्र बिल्कुल जायज है जो पुलिस वाले बंदूक को अजूबाम समझकर देख रहे हैं वो क्या दंगा नियंत्रण करेंगे और क्या गुंडों का कंट्रोल करेंगे। जनता की क्या, ये तो अपनी भी हिफाजत नहीं करने के काबिल नहीं हैं। और हैरानी की बात ये है कि यूपी पुलिस के फिसड्डीपन की ऐसी तस्वीरें आए दिन अलग अलग शहरों से आती रहती हैं।
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