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कारोबारी महिलाओं की स्थिति पर राष्ट्रपति कोविंद ने जताया अफसोस, कहा- नहीं मिला वाजिब हक

 Reported By: Bhasha
 Published : Apr 05, 2018 03:45 pm IST,  Updated : Apr 05, 2018 03:45 pm IST

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने गुरुवार को अफसोस जताया कि कारोबार जगत में महिलाओं को अभी तक उनका वाजिक हक नहीं मिल सका है...

Women haven't been given their due in business, says President Ram Nath Kovind | PTI Photo- India TV Hindi
Women haven't been given their due in business, says President Ram Nath Kovind | PTI Photo

नई दिल्ली: राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने गुरुवार को अफसोस जताया कि कारोबार जगत में महिलाओं को अभी तक उनका वाजिक हक नहीं मिल सका है। इसी संदर्भ में उन्होंने उद्योग जगत से बाजार में आपूर्ति की कड़ियों को ऐसा स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कदम उठाने को कहा है जिसमें महिलाओं की भी भागीदारी बढ़े। महिला उद्यमियों के शीर्ष संगठन फिक्की महिला संगठन (FLO) के सालाना सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि हमारे देश की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी आधी है। उन्होंने कहा, ‘वे विविध रूप में घर और बाहर काम कर हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान कर रही हैं। इसके बावजूद यह अफसोस की बात है कि जब कारोबार जगत की बात आती है तो उन्हें उनका वाजिब हक अब तक नहीं मिला है।’

समारोह में लेखिका-उद्यमी ट्विंकल खन्ना, प्रोड्यूसर एकता कपूर तथा वैज्ञानिक टेसी थामस जैसी विलक्षण प्रतिभा की धनी 9 महिलाओं को कार्यक्रम में FLO ‘आइकन’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कोविंद ने कहा, ‘हमें ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जिससे कार्यबल में हमारी बेटी-बहनें अधिक-से-अधिक भागीदारी कर सकें। कार्यबल में महिलाओं का अनुपात बढ़ाने के लिए हमें घरों में, समाज में तथा कार्य स्थल पर उपयुक्त, उत्साहजनक और सुरक्षित स्थिति सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था में केवल समायोजन के बजाए महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए महिला कंपनी क्षेत्र को महिला अनुकूल तथा महिलाओं को ध्यान रखने वाली आपूर्ति श्रृंखला सृजित करने के लिए दृढ़ संकल्प होकर कदम उठाना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘अगर कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है तो घरेलू आय तथा हमारा जीडीपी दोनों बढ़ेगा। हम अधिक समृद्ध राष्ट्र बनेंगे। इससे भी बड़ी बात यह है कि हमारा समाज अधिक समतामूलक होगा।’ राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने साधारण नागरिकों खासकर महिलाओं के बीच उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये निर्णायक कदम उठाया है। महिलाओं, अनुसूचित जाति तथा जनजाति के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए स्टैंड-अप इंडिया पहल की शुरुआत अप्रैल 2016 में हुई। करीब 45,000 कर्ज वितरित किए गए हैं। कोविंद ने कहा, ‘इसमें सेकरीब 39,000 महिलाओं को गए हैं।’

उन्होंने उद्यमियों की मदद के लिए सरकार की मुद्रा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि के तहत पिछले 3 वित्त वर्ष में 11.7 करोड़ कर्ज दिए गए हैं। इसमें से करीब 8.8 करोड़ कर्ज महिला उद्यमियों को दिए गए और उन्हें इस बात की खुशी है कि दिसंबर 2017 तक मुद्रा योजना में NPA (फंसे कर्ज) की संख्या ऋण मंजूरी के 8 प्रतिशत से भी कम है।

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