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आधार कार्ड के नए लुक को लेकर चल रही अफवाहों की क्या है हकीकत, PIB ने दूर किया भ्रम

 Edited By: Shakti Singh
 Published : May 03, 2026 08:36 pm IST,  Updated : May 03, 2026 08:36 pm IST

आधार कार्ड से पूरी जानकारी हटाकर इसे सिर्फ एक फोटो और क्यूआर कोड तक सीमित करने की अफवाहें पूरी तरह गलत हैं। सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं है। हालांकि, नए आधार कार्ड सिर्फ 6 साल तक के बच्चों को देने के लिए जनहित याचिका दायर की गई है।

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आधार कार्ड के साथ महिलाएं Image Source : PTI

आधार कार्ड के लुक में बदलाव को लेकर फैल रही अफवाहों का पीआईबी ने खंडन किया है। सरकारी प्रेस एजेंसी ने बताया है कि हाल ही में कुछ समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसी खबरें और पोस्ट प्रसारित हो रही हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि वर्ष के अंत तक आधार कार्ड के स्वरूप में बदलाव कर केवल एक फोटो और एक क्यूआर कोड तक सीमित किया जा सकता है। यह सही नहीं है। इस तरह के किसी भी बदलाव की कोई योजना नहीं है।

पीआईबी ने कहा है कि इस तरह के समाचार और सोशल मीडिया पोस्ट लोगों के मन में अनावश्यक भ्रम पैदा कर रहे हैं। ऐसे में आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी खबरों और सोशल मीडिया पोस्टों को नजरअंदाज करें और यूआईडीएआई द्वारा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और पीआईबी के माध्यम से जारी प्रेस विज्ञप्तियों के द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।

सिर्फ छोटे बच्चों को आधार कार्ड जारी करने की अपील

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कहा गया है कि नए आधार कार्ड सिर्फ 6 साल तक के बच्चों के बनने चाहिए, ताकि घुसपैठियों के पास आधार कार्ड बनवाने का विकल्प न हो। इस याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ सोमवार को सुनवाई करेगी। याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार कार्ड एक 'बुनियादी दस्तावेज' बन गया है, जो व्यक्तियों को राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और मतदाता पहचान पत्र जैसे अन्य पहचान दस्तावेज प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।

99 फीसदी भारतीयों के पास आधार कार्ड

याचिकाकर्ता ने कहा है कि यूआईडीएआई ने 144 करोड़ आधार कार्ड जारी किए हैं और 99 प्रतिशत भारतीयों का पंजीकरण हो चुका है। इसलिए किशोरों और वयस्कों को आधार कार्ड जारी करने के लिए सख्त दिशानिर्देश होने चाहिए ताकि घुसपैठियों को भारतीय नागरिक के तौर पर पहचान प्राप्त करने से रोका जा सके। याचिका में अधिकारियों को सामान्य सेवा केंद्रों पर डिस्प्ले बोर्ड लगाने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है, जिसमें उल्लेख हो कि 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या केवल ''पहचान का प्रमाण'' है, न कि नागरिकता, पता या जन्मतिथि का प्रमाण। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा, याचिका में यूआईडीएआई (जो आधार कार्ड जारी करने वाला प्राधिकरण है) और केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है। 

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