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दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 भारत में, बदनाम लिस्ट में इस शहर ने किया टॉप

 Published : Mar 11, 2025 07:26 am IST,  Updated : Mar 11, 2025 12:19 pm IST

एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के शीर्ष 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 13 भारत में हैं, और दिल्ली सबसे प्रदूषित राजधानी है। भारत में PM2.5 स्तर में गिरावट के बावजूद प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहा है।

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दिल्ली में पिछले कुछ सालों से प्रदूषण गंभीर समस्या बना हुआ है। Image Source : PTI

नई दिल्ली: मंगलवार को प्रकाशित एक नई रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के शीर्ष 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 भारत में हैं। प्रदूषित शहरों की इस लिस्ट में असम के बर्नीहाट का नाम सबसे ऊपर है। स्विस एयर क्वालिटी टेक्नोलॉजी कंपनी आईक्यूएयर की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2024 में कहा गया है कि दिल्ली वैश्विक स्तर पर सबसे प्रदूषित राजधानी बनी हुई है, जबकि भारत 2024 में दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश बन गया है। बता दें कि इस लिस्ट में भारत 2023 में तीसरे नंबर पर था।

दिल्ली में लगातार बना हुआ है प्रदूषण

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2024 में PM2.5 सांद्रता में 7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो 2023 में 54.4 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की तुलना में औसतन 50.6 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रह गई है। फिर भी, दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 6 भारत में हैं। दिल्ली में लगातार उच्च प्रदूषण स्तर दर्ज किया गया, जिसमें वार्षिक औसत PM2.5 सांद्रता 91.6 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी, जो 2023 में 92.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के आसपास ही थी।

5.2 साल तक कम हो जाती है औसत उम्र

दुनिया के शीर्ष 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 13 भारतीय शहर हैं: बर्नीहाट, दिल्ली, मुल्लांपुर (पंजाब), फरीदाबाद, लोनी, नई दिल्ली, गुरुग्राम, गंगानगर, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, मुजफ्फरनगर, हनुमानगढ़ और नोएडा। कुल मिलाकर, 35 प्रतिशत भारतीय शहरों में वार्षिक PM2.5 का स्तर WHO की सीमा 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 10 गुना अधिक है। भारत में वायु प्रदूषण एक खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है और इसकी वजह से एक आम हिंदुस्तानी की उम्र औसतन करीब 5.2 साल तक कम हो जाती है।

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Image Source : PTIदुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट।

प्रदूषण की वजह से होती हैं कई बीमारियां

पिछले साल प्रकाशित लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ की स्टडी के मुताबिक, 2009 से 2019 तक भारत में हर साल लगभग 15 लाख मौतें संभावित रूप से PM2.5 प्रदूषण के दीर्घकालिक संपर्क से जुड़ी थीं। PM2.5 का मतलब 2.5 माइक्रोन से छोटे वायु प्रदूषण कण हैं, जो फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे सांस लेने में समस्या, हृदय रोग और यहां तक ​​कि कैंसर भी हो सकता है। स्रोतों में वाहन का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और लकड़ी या फसल के कचरे को जलाना शामिल है।

‘अब हमें कार्रवाई की जरूरत है’

WHO की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाहकार सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि भारत ने वायु गुणवत्ता डेटा संग्रह में प्रगति की है, लेकिन पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास डेटा है; अब हमें कार्रवाई की जरूरत है। कुछ समाधान आसान हैं जैसे बायोमास को LPG से बदलना। भारत के पास इसके लिए पहले से ही एक योजना है, लेकिन हमें अतिरिक्त सिलेंडरों पर और सब्सिडी देनी चाहिए। पहला सिलेंडर मुफ़्त है, लेकिन सबसे गरीब परिवारों, खासकर महिलाओं को अधिक सब्सिडी मिलनी चाहिए। इससे उनका स्वास्थ्य बेहतर होगा और बाहरी वायु प्रदूषण कम होगा।’

‘प्रोत्साहन और सजा का मिश्रण जरूरी है’

विश्वनाथन ने कहा, 'शहरों में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार करना और कुछ कारों पर जुर्माना लगाना मददगार हो सकता है। प्रोत्साहन और सजा का मिश्रण जरूरी है।' भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की पूर्व महानिदेशक ने कहा, 'अंत में, उत्सर्जन कानूनों का सख्त पालन बहुत जरूरी है। उद्योगों और निर्माण स्थलों को नियमों का पालन करना चाहिए और शॉर्टकट अपनाने के बजाय उत्सर्जन में कटौती करने के लिए उपकरण लगाने चाहिए।' (भाषा)

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