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तमिलनाडु में गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, आखिर क्या है विवाद?

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jul 01, 2026 12:03 pm IST,  Updated : Jul 01, 2026 12:10 pm IST

याचिका में राज्य सरकार ने तर्क दिया है कि हाई कोर्ट ने कानून के दायरे से बाहर जाकर गोवध पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है, जो अधिनियम के प्रावधानों के दायरे से बाहर था।

मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती- India TV Hindi
मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती Image Source : FILE (PTI)

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें राज्य में गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया था। राज्य सरकार का तर्क है कि हाई कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह फैसला सुनाया है और यह आदेश राज्य के मौजूदा कानून के खिलाफ है। ऐसे में आइए समझते हैं कि यह पूरा कानूनी विवाद क्या है? 

क्या है तमिलनाडु का मौजूदा कानून?

तमिलनाडु में गोवध को लेकर तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 लागू है। इस कानून की धारा 4 के तहत राज्य में गोवध पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है। इसमें प्रावधान है कि केवल उसी गाय के वध की अनुमति दी जा सकती है जो-

  • 10 वर्ष से अधिक उम्र की हो चुकी हो।
  • काम करने या प्रजनन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो।
  • सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित की गई हो।

मद्रास हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

यह मामला हिंदू मक्कल कक्षी के नेता सूर्या की एक याचिका पर शुरू हुआ था, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर अवैध गोवध रोकने की मांग की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मणन की खंडपीठ ने निर्देश दिया था कि बकरीद या किसी भी अन्य दिन किसी भी गाय या बछड़े का वध न किया जाए। पशु वध केवल सरकार द्वारा निर्धारित बूचड़खानों में ही हो सकता है, वह भी बिना वैध प्रमाण पत्र के नहीं।

अदालत ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 48 (जो दुधारू पशुओं के संरक्षण की बात करता है) का हवाला दिया और कहा कि गोवध पर प्रतिबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए जरूरी है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी देना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

सरकार को इस फैसले से क्या आपत्ति है?

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाई कोर्ट के आदेश को विरोधाभासी बताया है। सरकार का कहना है कि जब 1958 का अधिनियम कुछ शर्तों के साथ गोवध की अनुमति देता है, तो हाई कोर्ट पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्देश कैसे दे सकता है?

हाई कोर्ट एक तरफ तो 1958 के अधिनियम की धारा 4 (शर्तों के साथ अनुमति) का पालन करने को कह रहा है और दूसरी तरफ बकरीद या किसी भी दिन गोवध पर पूरी तरह रोक लगा रहा है।

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