उत्तराखंड की चार धाम यात्रा से पहले साइब ठग एक्टिव हो गए हैं। इन साइबर ठगों पर नकेल कसने के लिए उत्तराखंड की एसटीएफ ने खास तैयारी की है। चार धाम के श्रद्धालुओं को ठगने वाले इन साइबर अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इनके पूरे जालसाज का भंडाफोड़ किए जाने का मास्टरप्लान तैयार किया गया है।
उत्तराखंड में चार धाम यात्रा सीजन शुरु होते ही केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले श्रद्धालु हेलीकाप्टर बुकिंग कराना शुरु कर देते हैं। ये बुकिंग ऑनलाइन होती हैं। शुरु में ही कई दिनों की बुकिंग हो जाती है। यहीं से साइबर ठगों का खेल शुरू होता है।
साइबर ठग फर्जी वेबसाइट और फेसबुक के माध्यम से धार्मिक श्रद्धालुओं की फर्जी बुकिंग कर देते हैं। बुकिंग को सही मानते हुए जब श्रद्धालु बद्रीनाथ और केदारनाथ पहुंचते हैं तो उसे पता चलता है की उसकी बुकिंग ही नहीं हुई है। तब उसे ठगे जाने का पता चलता है। इस कारण उसे आर्थिक नुकसान तो होता ही है। साथ ही परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।
चार धाम की यात्रा में साइबर ठगों को रोकने के लिए उत्तराखंड एसटीएफ ने एक टीम को तैनात किया है, जो फेसबुक और अन्य माध्यमों पर नजर रख रही है। साथ ही इन फर्जी वेबसाइट को बंद भी करा रही है। इसके लिए कोर्ट से आदेश भी करा लिए हैं।
एसटीएफ के अनुसार, ठगों का निशाना मई और जून महीने की बुकिंग पर रहता है। इन दोनों महीनों मे श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। इसी का फायदा उठाने की कोशिश मे ठग रहते हैं। इसी को देखते हुए लोगों को जागरूक बनाने के लिए कई माध्यम से प्रचार भी किया जा रहा है। ठगों पर मुकदमें भी किए जा रहे हैं।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र की मानें तो इन घोटालों में पेशेवर दिखने वाली लेकिन नकली वेबसाइटें, सोशल मीडिया प्रोफाइल और वॉट्सएप अकाउंट बनाकर ग्राहकों को आकर्षक ऑफर दिए जाते हैं ताकि ग्राहक अपना फायद देखकर ऑनलाइन बुकिंग के लिए प्रेरित हों। स्कैमर्स इन फेक वेसाइट पर निम्नलिखित सेवाओं की पेशकश करते हैं।
चार धाम यात्रा के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग करते समय साइबर अपराधों से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतें। सबसे पहले चार धाम की टिकट बुकिं करते समय आधिकारिक वेबसाइट का ही प्रयोग करें। उत्तराखंड पर्यटन विभाग या IRCTC की वेबसाइट से ही बुकिंग करें। अनजान या संदिग्ध वेबसाइटों से बचें।
रिपोर्ट- हिमांशु कुशवाहा
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