अयोध्या के राम मंदिर और बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान के चोरी के आरोप सामने आने के बाद बाकी मंदिर प्रशासन अलर्ट हो गए हैं। हरिद्वार के विख्यात मां मंसा देवी मंदिर में बुधवार को एक नई पहल की गई है। मंसा देवी मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों को बिना जेब वाले कपड़े दिए गए हैं। धार्मिक स्थानों पर चढ़ावे और दान की पारदर्शी व्यवस्थाएं बनाने को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच यह कदम उठाया गया।
पहले दिलवाई गई थी शपथ
बिना जेब वाले कपड़े दिए जाने के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मंसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर और बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़े विवादों के सामने आने के बाद कुछ दिन पहले ही तय किया गया था कि मंदिर के पुजारी बिना जेब वाले कपड़े पहन कर सेवा कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमने मंदिर में सभी पुजारियों और कर्मचारियों को शपथ भी दिलवाई थी।
महंत रविंद्रपुरी ने कहा, 'मंदिरों में दान के पैसों की चोरी के आरोपों को ध्यान में रखते हुए हमारा मानना है कि अगर कपड़ों में जेब ही नहीं होगी, तो चढ़ावे को जेब में रखने की आशंका भी नहीं रहेगी। केवल कुछ लोगों की गलती से पूरे मंदिर प्रबंधन और सनातन पर सवाल उठते हैं, इसलिए श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।'
मंदिर परिसर में चप्पे-चप्पे पर निगरानी
महंत ने कहा कि अब से मंदिर में सभी पुजारी और कर्मचारी यही कपड़े पहनेंगे। उन्होंने कहा कि मंसा देवी मंदिर परिसर में 65 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है। इनकी मदद से मंदिर के कार्यालय से चप्पे-चप्पे पर निगरानी रहती है।
दान के एक भी रुपये की न हो हेराफेरी
महंत ने कहा कि हमारा प्रयास रहता है कि हर भक्त को दानराशि की रसीद दी जाए और दान के एक भी रुपए की हेराफेरी न की जा सके। उन्होंने पुजारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह तथा सभी कर्मचारियों इस काम में मंदिर ट्रस्ट का पूरा सहयोग कर रहे हैं। मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी इस फैसले की सराहना की है। साथ ही कहा कि ऐसे कदमों से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा। (इनपुट- पीटीआई)
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