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लॉरेंस बिश्नोई गैंग कैसे करता है लड़कों की भर्ती? कम उम्र के लड़के ज्यादा बन रहे शिकार

Reported By : Abhay Parashar Edited By : Rituraj Tripathi Published : Oct 16, 2024 11:51 pm IST, Updated : Oct 17, 2024 06:23 am IST

लॉरेंस बिश्नोई गैंग नई उम्र के लड़कों को अपनी गैंग में भर्ती कर काम करवाता है। लड़कों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया पर लॉरेंस की रील्स और वीडियोज डाले जाते हैं।

Lawrence Bishnoi- India TV Hindi
Image Source : FILE लॉरेंस बिश्नोई

नई दिल्ली: मुंबई के बांद्रा में NCP अजित पवार गुट के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद से गैंगेस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम काफी चर्चा में है। इस बीच ये जानकारी सामने आई है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग किस तरह से यंग लड़कों को गैंग में भर्ती करता है।

ये है भर्ती का तरीका

दरअसल लॉरेंस जब भी कोर्ट या जेल जाता है तो उसके गुर्गे(जो जेल के बाहर हैं) लॉरेंस की वीडियो बनाते हैं। इन वीडियोज में लॉरेंस कभी मूंछों को ताव देता है तो कभी कैमरे को देखकर मुस्कुराता है। सोशल मीडिया से ही लॉरेंस गैंग इतना बड़ा बना है।

ऐसे में कम उम्र के लड़के जो घर से गरीब है, वह इन वीडियोज से प्रभावित होते हैं और लॉरेंस की तरह बड़ा डॉन बनना चाहते हैं। वो सोशल मीडिया के जरिए लॉरेंस के गुर्गों के संपर्क में आते हैं। जिनसे लॉरेंस किसी को भी गोली मरवा देता है।

मूसेवाला और बाबा सिद्दीकी केस में कम उम्र के थे शूटर

यहां गौर करने वाली बात ये है कि पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला और बाबा सिद्दीकी केस में फायरिंग करने वाले शूटर कम उम्र के थे। हालांकि कई बार लॉरेंस और उसके भाई अनमोल का नाम लेकर लोकल क्रिमिनल भी धमकी भरे वीडियो बनाते हैं और नाम लॉरेंस और उसके भाई अनमोल का लेते हैं। 

वीडियो के जरिए धमकी

2023 का ये वीडियो हरियाणा के एक सिंगर को भेजा गया था, जिसमें धमकी देने वाला पिस्टल में कारतूस डालकर दिखा रहा था। बाद में जांच में आया कि धमकी देने वाले लोकल लड़के थे, जिन्होंने अनमोल बिश्नोई का नाम इस्तेमाल किया था। बाद में वह गिरफ्तार हो गए थे। 

हालही में खबर सामने आई थी कि बाबा सिद्दीकी की हत्या का एक ही मकसद था और वो था सलमान खान और पूरे मुम्बई और मायानगरी मे दशहत पैदा करना। इसके साथ ही इस हत्याकांड से जुड़े लॉरेंस बिश्नोई गैंग का मकसद अंडरवर्ल्ड और मुंबई के डॉन दाऊद इब्राहिम तक संदेश पहुंचाना भी था। बता दें कि इस हत्याकांड का दाऊद कनेक्शन भी सामने आया है और उस दाऊद कनेक्शन की जांच जारी है।

बाबा सिद्दीकी मामले में शूटर्स 28 दिन में 5 बार बाबा सिद्दीकी के घर और दफ्तर रेकी करने गए थे। बाबा सिद्दीकी के घर और दफ्तर के बाहर आस-पास वे घंटों रुकते थे  और उनकी हर मूवमेंट को ट्रैक करते थे। रेकी के बाद दशहरे का दिन हत्याकांड के लिए चुना गया था। हत्याकांड में शामिल आरोपी जीशान अख्तर वारदात के वक्त मुंबई से बाहर था। जीशान मुंबई के बाहर से पूरे ऑपरेशन को कॉर्डिनेट कर रहा था। शूटरों को शुभम का भाई प्रवीण पुणे से मुंबई छोड़ने आया था। शूटरों को पैसे शुभम ने ही दिए थे।

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