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अब ट्रेन से जा सकेंगे भूटान..., पड़ोसी देश के इन दो शहरों तक मिलेगी रेल कनेक्टिविटी

 Published : Sep 29, 2025 04:28 pm IST,  Updated : Sep 29, 2025 11:31 pm IST

भारत और भूटान के बीच दो क्रॉस बॉर्डर रेलवे कनेक्टिविटी विकसित करने पर सहमति हो गई है। एक लाइन बानरहाट को समत्से और दूसरी लाइन कोकराझार को गेलेफू से जोड़ेगी। ये भारत से भूटान तक पहली क्रॉस बॉर्डर रेलवे परियोजना होगी।

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भारत से भूटान तक ट्रेन सर्विस को मंजूरी। Image Source : PTI

भारत और भूटान की सरकारों के बीच सीमा पार रेलवे परियोजनाएं शुरू करने के लिए अहम सहमति बन गई है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को इस बात की घोषणा कर दी है। जानकारी के मुताबिक, ये भारत और भूटान के बीच ऐसी पहली क्रॉस बॉर्डर रेल परियोजना होने जा रही है। आइए जानते हैं कि ये रेल परियोजना दोनों देशों के किन हिस्सों को जोड़ेगी और इसका फायदा क्या होगा।

रेल से जुड़ेंगे भारत और भूटान के ये शहर

सामने आई जानकारी के मुताबिक, भारत और भूटान के बीच रेलवे कनेक्टिविटी को लेकर हुई डील के तहत पश्चिम बंगाल के बानरहाट को भूटान के समत्से से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही दूसरी लाइन असम के कोकराझार को भूटान के गेलेफू से जोड़ेगी।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री इस रेल परियोजना की घोषणा करते हुए कहा- "यह भूटान के साथ रेल कनेक्टिविटी की परियोजनाओं का पहला सेट होगा। इस संपर्क के लिए समझौता ज्ञापन पर पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।"

रेल मंत्री ने क्या बताया?

भारत और भूटान के बीच रेल कनेक्टिविटी के लिए परियोजना को मंजूरी मिलने पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी बयान जारी किया है। उन्होंने कहा- "यह परियोजना भूटान के दो अहम शहरों को जोड़ रही है। एक गेलेफू है, जिसे माइंडफुलनेस सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। और दूसरा, समत्से, जो एक औद्योगिक शहर है। ये दोनों परियोजनाएं भारतीय रेलवे के कोकराझार और बनारहाट नेटवर्क से शुरू होंगी।"

परियोजना में कितना खर्च आएगा?

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जानकारी दी है कि "भारत-भूटान के बीच रेल परियोजना के लिए अनुमानित निवेश लगभग 4033 करोड़ रुपये है। इस रेल परियोजना की कुल लंबाई करीब 90 किलोमीटर है। 89 किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क बनाया जाएगा।"

क्या है इस परियोजना का मकसद?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि "भारत, भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भूटान का ज्यादातर फ्री ट्रेड भारतीय बंदरगाहों के माध्यम से होता है। भूटानी अर्थव्यवस्था के विकास और लोगों की वैश्विक नेटवर्क तक बेहतर पहुंच के लिए एक अच्छा और निर्बाध रेल संपर्क होना बहुत जरूरी है। इसीलिए इस पूरी परियोजना को शुरू किया गया है।"

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