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Exclusive: हथियारों के मामले में भारत ने की कितनी तरक्की? DRDO चीफ ने उदाहरण देते हुए समझाया

DRDO चीफ डॉ. समीर वी. कामत ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया कि भारत आत्मनिर्भर रक्षा तकनीकों में तेजी से प्रगति कर रहा है। ब्रह्मोस, आकाश, D4 सिस्टम समेत कई उन्नत हथियार प्रणालियां सेना में शामिल की जा रही हैं।

Reported By : Manish Prasad Edited By : Vineet Kumar Singh Published : Jun 05, 2025 07:38 pm IST, Updated : Jun 06, 2025 07:38 pm IST
DRDO Chief Sameer V Kamath, DRDO interview 2025- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV DRDO चीफ डॉ. समीर वी. कामत

नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने इंडिया टीवी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में भारत की रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे अभूतपूर्व कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने पाकिस्तान के साथ हाल ही में हुई झड़प में इस्तेमाल की गई हथियार प्रणालियों, रडार तकनीक, मिसाइल सिस्टम और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान DRDO द्वारा विकसित कई हथियारों ने शानदार प्रदर्शन किया है और पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है।

आकाश मिसाइल सिस्टम पर क्या बोले DRDO चीफ?

डॉ. कामत ने बताया कि हाल के संघर्ष में DRDO द्वारा विकसित आकाश मिसाइल सिस्टम, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM), और ड्रोन-रोधी D4 सिस्टम का एकीकृत उपयोग किया गया। आकाश सिस्टम का विकास 2004-05 में शुरू हुआ था और इसे बाद में इजरायल के सहयोग से MRSAM के रूप में उन्नत किया गया। D4 सिस्टम ने ड्रोन को मार गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन तीनों प्रणालियों को एकीकृत रूप से उपयोग करने से भारत की रक्षा क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। डॉ. कामत ने गर्व के साथ कहा कि इन प्रणालियों ने 'जबर्दस्त' प्रदर्शन किया और दुश्मन के किसी भी हमले को विफल करने में सक्षम रही।

रडार तकनीक में कहां खड़ा है भारत?

DRDO ने रडार तकनीक में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। डॉ. कामत ने बताया कि भारत अब सर्विलांस, ट्रैकिंग और मल्टी-फंक्शनल रडार डिजाइन करने में सक्षम है, जो तीनों सेनाओं (थल, नौसेना और वायुसेना) की जरूरतों को पूरा करते हैं। पहले हर रडार स्वतंत्र रूप से काम करता था, लेकिन अब इन्हें एकीकृत कर लिया गया है। इस एकीकरण से रीयल-टाइम जानकारी प्राप्त करने की क्षमता बढ़ी है, जिससे भारत की रक्षा प्रणाली और मजबूत हुई है।

DRDO के तरकश में अभी कौन से तीर?

बता दें कि DRDO के तरकश में अभी कई ऐसे तीर हैं जो सामने आने हैं। DRDO अगले दो-तीन वर्षों में कई स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को सेना में शामिल करने की योजना बना रहा है। इनमें शामिल हैं:

  1. वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS)  
  2. मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM)  
  3. प्रलय मिसाइल  
  4. रुद्रम मिसाइल  
  5. एडवांस्ड लाइट टॉरपीडो  
  6. मल्टी-इन्फ्लुएंस लैंड माइन

इन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सेनाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत होंगी।

DRDO Chief Sameer V Kamath, DRDO interview 2025

Image Source : PTI
ब्रह्मोस मिसाइलों ने पूरी दुनिया में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है।

ब्रह्मोस समेत कई मिसाइलों पर चल रहा काम

डॉ. कामत ने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल की विस्तारित रेंज पर काम चल रहा है, जो अगले 2-3 वर्षों में सेना का हिस्सा बन जाएगी। ब्रह्मोस एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन) को विभिन्न विमानों में एकीकृत किया जाएगा। वर्तमान में यह केवल सुखोई विमानों में इस्तेमाल होती है, लेकिन भविष्य में यह और सशक्त होगी। ब्रह्मोस की सटीकता और दुश्मन के लक्ष्यों को नष्ट करने की क्षमता इसे एक असाधारण मिसाइल बनाती है। DRDO एयर-टू-एयर मिसाइलों पर भी तेजी से काम कर रहा है। अस्त्र मिसाइल पहले ही सेना में शामिल हो चुकी है, और अब अस्त्र-2 और अस्त्र-3 पर काम चल रहा है। इसके अलावा, रुद्रम मिसाइल भी एक महत्वपूर्ण प्रणाली के रूप में उभर रही है।

भारत बनाएगा 'आयरन डोम' जैसा डिफेंस सिस्टम!

डॉ. कामत ने बताया कि भारत आयरन डोम जैसे लेयर्ड डिफेंस सिस्टम पर काम कर रहा है। वर्तमान में भारत के पास आकाश मिसाइल, QRSAM, और S-400 जैसी प्रणालियां हैं। इसके अलावा, S-500 के समकक्ष कुशा मिसाइल पर काम चल रहा है। पूरे देश की सुरक्षा के लिए इन प्रणालियों की कई इकाइयों की आवश्यकता होगी। एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को पिछले साल मंजूरी मिली थी। इसका पहला प्रोटोटाइप 2029 तक तैयार होगा, जिसके बाद उड़ान परीक्षण शुरू होंगे। 2034 तक यह परियोजना पूरी होगी और 2035 से AMCA भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनने लगेगा। यह परियोजना प्राइवेट सेक्टर या HAL के साथ मिलकर पूरी की जा सकती है। 

Mk1A, आर्टिलरी और लाइट टैंक पर कितनी प्रगति?

DRDO चीफ ने बताया कि लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A की डिलीवरी में GE इंजन की सप्लाई चेन में देरी के कारण कुछ विलंब हुआ है। भारतीय वायुसेना ने 83 LCA Mk1A का ऑर्डर दिया है, जो अगले 3 वर्षों में डिलीवर होंगे। LCA Mk2 का विकास भी शुरू हो चुका है और यह 2033 तक वायुसेना को मिलना शुरू हो जाएगा। DRDO आर्टिलरी सिस्टम जैसे ATAGS और पिनाक पर भी काम कर रहा है। लाइट टैंक के यूजर ट्रायल जून-जुलाई 2025 से शुरू होंगे, और इसका उत्पादन 2027 से शुरू होगा। 

'मौजूदा सरकार ने आत्मनिर्भरता पर दिया ध्यान'

डॉ. कामत ने कहा कि लड़ाई में गेमचेंजर्स बनते जा रहे UAV को लेकर DRDO बेसिक तकनीक और एकीकरण पर काम कर रहा है। इसके अलावा, स्वार्म ड्रोन से निपटने के लिए ड्रोन-रोधी सिस्टम पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दिया है। पहले DRDO केवल अनुसंधान और विकास तक सीमित था, लेकिन अब एक मजबूत इकोसिस्टम के कारण भारत रक्षा तकनीक में वैश्विक लीडर बनने की ओर अग्रसर है। पिनाक, ब्रह्मोस, और आकाश जैसे सिस्टम इसका प्रमाण हैं।

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