Kaveri Engine: पिछले कुछ समय से कावेरी इंजन को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें चल रही हैं। खास तौर पर भारतीय सेना द्वारा आतंकवाद को खत्म करने के लिए शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से स्वदेशी तकनीक को लेकर बातें की जा रही हैं। कई डिफेंस एक्सपर्ट्स ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए हैं। यही नहीं कावेरी इंजन के विकास को प्राथमिकता देने और तेजी लाने की मांग भी की है। इस इंजन को आर्म्ड एयरोनॉटिक्स टेक्नोलॉजी में भारत की आत्मनिर्भरता की बड़ी खोज कहा जा रहा है।
कावेरी इंजन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #FundKaveriEngine ट्रेंड में बना हुआ है। कई यूजर्स ने सरकार से इस प्रोजेक्ट के लिए फंड अलोकेट करने की मांग की है। कावेरी इंजन भारत के सेल्फ सफीशिएंट मिलिट्री एविएशन के लिए अहम साबित हो सकती है। आइए, जानते हैं DRDO के इस प्रोजेक्ट के बारे में...
क्या है Kaveri Engine प्रोजेक्ट?
कावेरी इंजन DRDO के गैस टर्बाइन रिसर्च प्रतिष्ठान (GTRE), बेंगलुरू द्वारा डेवलप किया गया स्वदेशी जेट इंजन है। DRDO की वेबसाइट के मुताबिक, यह एक लो-बाईपास ट्विन स्पूल टर्बोफैन इंजन है, जो 80kN का थ्रस्ट जेनरेट कर सकता है। इस इंजन का उद्देश्य शुरू में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस को शक्ति प्रदान करना था। इस इंजन में हाई टेंपरेचर और हाई स्पीड में मिलने वाली ताकत यानी थ्रस्ट की हानि को कम करने के लिए फ्लैट रेटेड डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है।

इस इंजन में मौजूद ट्विन-लेन फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) प्रणाली अतिरिक्त विश्वसनीयता के लिए मैन्युअल बैकअप के साथ सटीक नियंत्रण सुनिश्चित करती है। इसका डिजाइन इंजन को कई परिचालन स्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बनाने में मदद करता है। इस तरह से यह इंजन कई मायनों में एडवांस टेक्नोलॉजी वाला होगा। कावेरी को DRDO की GTRE ने बनाया है। हालांकि, फ्रांस की कंपनी स्नेकमा (Safran) ने भी इसे बनाने में टेक्निकल मदद की है।
क्यों चला Fund Kaveri ट्रेंड?
बता दें 1980 की दशक में भारत सरकार ने अपने लड़ाकू विमानों के लिए विदेशी इंजनों पर निर्भरता को कम करने के लिए इस परियोजना की शुरुआत की थी लेकिन 1998 में किए गए पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद लगे प्रतिबंधों की वजह से थ्रस्ट में कमी, वजन संबंधी मुद्दों और देरी जैसी चुनौतियों ने इस परियोजना को प्रभावित किया था। 2008 में कावेरी इंजन को तेजस प्रोग्राम से अलग कर दिया गया था लेकिन अब घातक स्टील्थ यूएवी जैसे मानव रहित विमानों के लिए इसे विकसित किया जा रहा है। यही कारण है कि इस स्वदेशी इंजन के लिए सरकार से सोशल मीडिया पर फंड दिए जाने की बात कही जा रही है।

29 नवंबर 2021 को तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने राज्यसभा में कावेरी इंजन प्रोजेक्ट से जुड़े सवाल पर कहा था कि भविष्य में, एक अंतर्राष्ट्रीय इंजन हाउस के सहयोग से हमारे अपने विमानों को शक्ति देने के लिए एलसीए वेरिएंट और एएमसीए जैसे स्वदेशी इंजन विकसित करने का प्रस्ताव है। कावेरी इंजन परियोजना के माध्यम से निर्मित तकनीकी क्षमताओं का उपयोग किया जाएगा।
कावेरी इंजन के फीचर्स
- यह टर्बोफैन पर बेस्ड है, तेज रफ्तार में भी कम ईंधन की खपत करेगा।
- इसका डिजाइन ऐसा है कि ऊंचाई और हाई स्पीड में भी ये दमदार काम कर सकता है।
- ये तेजस जैसे विमानों के अलावा ड्रोन, कार्गो प्लेन और सिविल एविएशन में भी काम आ सकता है।
- इसमें हाई-प्रेशर कंप्रेसर, कम्बस्टर और टरबाइन दिए गए हैं, जो इसे अलग-अलग जरूरतों के लिए फिट बनाते हैं।
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