दुनियाभर में 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को हासिल करने की होड़ मची हुई है। कुछ ही देश ऐसे हैं जिनके पास ये विमान हैं। भारत भी अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बना रहा है। इस बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के इंजन पर बड़ा अपडेट सामने रखा है। राजनाथ सिंह ने इस बात का खुलासा कर दिया है कि भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के इंजन का निर्माण किस देश और किस कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा। आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या खुलासा किया है।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- "आज हम 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में भी आगे कदम बढ़ा चुके हैं। हम एयरक्राफ्ट का इंजन भी भारत में ही बनाने की तरफ बढ़ चुके हैं। हम लोग फ्रेंच कंपनी साफरान के साथ इंजन मेकिंग का काम भारत में शुरू करने जा रहे हैं।"
आज भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट, 2014 की तुलना में, लगभग 35 गुना बढ़ चुका है। साल 2013-14 में भारत से होने वाला डिफेंस एक्सपोर्ट केवल 686 करोड़ का था वह आज 2024-25 में बढ़ कर 23,622 करोड़ तक पहुंच गया है। पहले हम अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर थे, लेकिन आज भारत डिफेंस के मामले में बड़ी तेजी से आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है। पिछले ग्यारह वर्षों में देश का डिफेंस बजट, जो 2013-14 में ₹2,53,346 करोड़ था, वह बढ़कर लगभग तीन गुना यानि 2024-25 में ₹6,21,940.85 करोड़ तक पहुँच गया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद तो यह डिफेंस बजट और भी बढ़ने वाला है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- "आपको यह जानकर खुशी होगी कि अभी कुछ दिन पहले हमने HAL को करीब 66,000 करोड़ रुपये की लागत से 97 तेजस फाइटर प्लेन्स बनाने का नया ऑर्डर दिया है। इसके पहले भी HAL को 48,000 करोड़ रुपए की लागत से 83 एयरक्राफ्ट बनाने का order दिया गया था। विदेशी कंपनियों के इक्विपमेंट की जिस क्वालिटी से हम प्रभावित होते हैं, वह क्वालिटी एक दिन में नहीं बनी। उसमें भी बड़ा समय लगा और उन्हें अपने देश का बराबर सपोर्ट मिला। हमारे HAL का ही उदाहरण लीजिए, इसने भी पहले दिन ही ‘तेजस’ का निर्माण नहीं कर लिया पर हमारे समर्थन और हमारी सेना के बढ़ते भरोसे ने HAL को ‘तेजस’ के निर्माण की ओर आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान की। हमारा तेजस एयरक्राफ्ट भारत की स्वदेशी डिफेंस कैपेबिलिटीज का शानदार उदाहरण बनने वाला है। ऐसा नहीं है कि हमें इस काम में समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है, मगर हमने यह तय किया है कि हम हर समस्या का समाधान निकालेंगे और भारत में फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने की पूरी कैपेबैलिटी जरूर खड़ी करेंगे।"
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- "हम निजी क्षेत्र को एक उपयुक्त विकास वातावरण प्रदान कर रहे हैं। इसके अनुसार, हमने रणनीतिक साझेदारी मॉडल के माध्यम से लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक और पनडुब्बियों सहित मेगा रक्षा कार्यक्रम के निर्माण के अवसर खोले हैं, जो आने वाले वर्षों में हमारी निजी कंपनियों को वैश्विक दिग्गज बनने में मदद करेंगे। हम यह अच्छी तरह से निहित हैं, कि निजी क्षेत्र में रक्षा अनुसंधान और विकास को स्थापित करने में समय लगता है। इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए, हम डीआरडीओ के माध्यम से निःशुल्क, 'ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी' के अवसर प्रदान करते हैं। यह रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। जब हम आत्मनिर्भरता की बात करते हैं तो हम सिर्फ भारतीय कंपनियों की बात नहीं करते। दुनिया की सबसे बड़ी-बड़ी डिफेंस कंपनीज हैं उन सबके लिए आज मौका है, भारत में निवेश करने का, यहां डिफेंस इक्विपमेंट के सह-उत्पादन का।"
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