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बैक्ट्रियन ऊंट, शिकारी पक्षी और जांस्कर पोनी, कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी को यूं दिखेंगे भारतीय सेना के ‘मूक योद्धा’

 Reported By: Manish Prasad, Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Dec 31, 2025 12:20 pm IST,  Updated : Dec 31, 2025 12:20 pm IST

गणतंत्र दिवस 2026 के दिन कर्तव्य पथ पर भारतीय फौज के ‘मूक योद्धा’ इतने भव्य और संगठित रूप में पहली बार देश को सलामी देंगे। बैक्ट्रियन ऊंट, शिकारी पक्षी, सेना के कुत्तों और पोनी यह परेड दिखाएगी कि भारत की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि अद्भुत साहस और निस्वार्थ सेवा से भी की जाती है।

Indian army silent warriors- India TV Hindi
कर्तव्य पथ पर दिखेंगे भारतीय सेना के ‘मूक योद्धा’। Image Source : REPORTERS INPUT

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर इस बार कर्तव्य पथ पर एक खास और भावनात्मक दृश्य देखने को मिलेगा। भारतीय सेना के ‘मूक योद्धा’ पहली बार इतने बड़े और संगठित रूप में परेड में शामिल होंगे। ये मूक योद्धा न केवल सेना की ताकत दिखाएंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि देश की रक्षा में उनके योगदान को कितनी अहम जगह दी जाती है। इस विशेष दस्ते में दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार जांस्कर पोनी, चार शिकारी पक्षी (रैप्टर्स), भारतीय नस्ल के 10 सेना के कुत्ते और सेना में पहले से काम कर रहे 6 पारंपरिक सैन्य कुत्ते शामिल होंगे।

बैक्ट्रियन ऊंट करेंगे दस्ते की अगुवाई

दस्ते की अगुवाई करेंगे बैक्ट्रियन ऊंट, जिन्हें हाल ही में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में तैनात किया गया है। ये ऊंट बहुत ठंडे मौसम और 15 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर आसानी से काम कर सकते हैं। ये 250 किलोग्राम तक का सामान ढो सकते हैं और कम पानी-चारे में लंबी दूरी तय करते हैं। इससे सेना को दूरदराज और कठिन इलाकों में रसद पहुंचाने में बड़ी मदद मिलती है।

कदम मिलाएंगे जांस्कर पोनी

इसके बाद कदम से कदम मिलाकर चलेंगी जांस्कर पोनी, जो लद्दाख की एक दुर्लभ और स्वदेशी नस्ल हैं। आकार में छोटी होने के बावजूद इनमें जबरदस्त ताकत और सहनशक्ति होती है। ये पोनी माइनस 40 डिग्री तापमान और बहुत ऊंचाई वाले इलाकों में 40 से 60 किलो वजन लेकर चल सकती हैं। साल 2020 से ये सियाचिन जैसे कठिन क्षेत्रों में सैनिकों के साथ सेवा दे रही हैं और कई बार एक दिन में 70 किलोमीटर तक गश्त करती हैं।

शिकारी पक्षी करेंगे निगरानी

परेड में शामिल चार शिकारी पक्षी (रैप्टर्स) सेना की नई और स्मार्ट सोच को दिखाते हैं। इनका इस्तेमाल निगरानी और हवाई सुरक्षा से जुड़े कामों में किया जाता है, जिससे सेना के अभियान ज्यादा सुरक्षित बनते हैं।

'मूक योद्धा' क्यों हैं खास?

इस परेड का सबसे भावुक हिस्सा होंगे भारतीय सेना के कुत्ते, जिन्हें प्यार से 'मूक योद्धा' कहा जाता है। इन कुत्तों को मेरठ स्थित रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स केंद्र में प्रशिक्षित किया जाता है। ये आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों की पहचान, खोज-बचाव कार्यों और आपदा राहत में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। कई बार इन कुत्तों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सैनिकों की जान बचाई है।

सेना में इन नस्लों के कुत्ते किए जा रहे शामिल

‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत सेना अब मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बई और राजापलायम जैसी भारतीय नस्लों के कुत्तों को भी बड़े स्तर पर शामिल कर रही है। यह भारत की अपनी क्षमताओं पर बढ़ते भरोसे का साफ संकेत है।

कर्तव्य पथ से गुजरेंगे 'मूक योद्धा'

गणतंत्र दिवस 2026 पर जब ये पशु कर्तव्य पथ से गुजरेंगे, तो वे यह याद दिलाएंगे कि देश की रक्षा सिर्फ हथियारों से नहीं होती। सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान तक, इन पशुओं ने चुपचाप लेकिन मजबूती से अपना फर्ज निभाया है। ये सिर्फ सहायक नहीं हैं, बल्कि भारतीय सेना के सच्चे साथी और चार पैरों पर चलने वाले वीर योद्धा हैं।

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