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23 मई तक दलित परिवारों की बेदखली का आदेश, केरल में जमीन से जुड़े विवाद ने पकड़ा तूल

 Published : May 22, 2026 07:16 am IST,  Updated : May 22, 2026 07:16 am IST

केरल के एर्नाकुलम जिले के किझक्कंबलम में जमीन विवाद को लेकर दलित परिवारों की बेदखली का मामला गरमा गया है। कोर्ट ने 23 मई तक परिवारों को हटाने का आदेश दिया है। पुलिस की कार्रवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद कई लोग हिरासत में लिए गए हैं।

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केरल के एर्नाकुलम में जमीन विवाद गहरा गया है। Image Source : ANI

कोच्चि: केरल के एर्नाकुलम जिले के किझक्कंबलम स्थित परीयाथुकावु इलाके में रहने वाले दलित परिवारों को हटाने के मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है। पेरुंबवूर की मुंसिफ कोर्ट ने गुरुवार को पुलिस को आदेश दिया कि इलाके में रह रहे 7–8 दलित परिवारों को 23 मई तक वहां से हटाया जाए। यह आदेश उस रिपोर्ट के आधार पर दिया गया, जिसे अदालत में एडवोकेट कमिश्नर ने पेश किया था। रिपोर्ट में कहा गया कि बुधवार को परिवारों को हटाने की कोशिश स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण सफल नहीं हो सकी।

जमीन का मालिकाना हक किसी और के पास

बुधवार को पुलिस की बड़ी टीम दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची थी। पुलिस एडवोकेट कमिशन की मदद से करीब ढाई एकड़ जमीन खाली कराने गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस जमीन का मालिकाना हक एक अन्य शख्स के पास बताया गया है। हालांकि, जैसे ही अधिकारियों ने इलाके में प्रवेश करने की कोशिश की, स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते-देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पानी की बौछारें करनी पड़ीं। इस दौरान कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया।

विरोध करने पर 50 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

पुलिस ने बाद में 50 लोगों की पहचान करके उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। थडियिट्टापरम्बु पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी के अनुसार, इन लोगों पर सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोकने का आरोप लगाया गया है। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी कि BNS की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इस पूरे मामले में CPM भी सक्रिय हो गई है। पार्टी ने गुरुवार को इलाके में एक सुरक्षा समिति बनाई, ताकि परिवारों को आगे किसी पुलिस कार्रवाई से बचाया जा सके।

'जनता का आंदोलन ही इन्हें सुरक्षा दे सकता है'

CPM के वरिष्ठ नेता पी. राजीव ने इलाके का दौरा करने के बाद कहा कि पिछली LDF सरकार ने सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वहां रह रहे लोगों को नियमों के अनुसार जमीन का अधिकार देने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा, 'सरकार बदलने से पहले सर्वे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। अब जिस तरह बल प्रयोग किया गया, वह निंदनीय है। इसलिए यहां सुरक्षा समिति बनाई गई है। पहले बिना समिति के भी लोगों की सुरक्षा हो जाती थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं और जनता का आंदोलन ही इन्हें सुरक्षा दे सकता है।'

पुलिस कार्रवाई की जांच के दिए गए आदेश

राजीव ने राज्य सरकार से मांग की कि सर्वे की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए और तब तक जमीन को लेकर कोई कार्रवाई न की जाए। वहीं, राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने राज्य पुलिस प्रमुख रवाडा चंद्रशेखर को निर्देश दिया कि किझक्कंबलम में हुई पुलिस कार्रवाई की पूरी जांच कर 3 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए। गृह मंत्री ने कहा कि जांच में यह देखा जाए कि पुलिस की ओर से कोई चूक या कमी तो नहीं हुई। साथ ही भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सुझाव भी दिए जाएं, ताकि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

सुप्रीम कोर्ट में शख्स ने जीती थी कानूनी लड़ाई

दरअसल, यह विवाद कई वर्षों पुराना है। जिस जमीन पर दलित परिवार लंबे समय से रह रहे हैं, उस पर एक अन्य व्यक्ति ने मालिकाना हक का दावा किया था। अदालतों में चले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसी व्यक्ति के अधिकार को सही माना। इसके बाद केरल हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति के अधिकार लागू कराने के निर्देश दिए, जिसके आधार पर यह बेदखली अभियान चलाया जा रहा है। दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे जिस जमीन पर रह रहे हैं, वह सरकारी जमीन है, निजी नहीं। हालांकि, उनकी ओर से दायर सभी याचिकाएं अदालतों ने खारिज कर दी हैं।

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