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UGC एक्ट के विरोध में उतरे कवि कुमार विश्वास, लिखा- 'मैं अभागा सवर्ण हूं मेरा, रौंया-रौंया...'

 Published : Jan 27, 2026 11:06 am IST,  Updated : Jan 27, 2026 12:02 pm IST

UGC एक्ट को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का प्रदर्शन जारी है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अब इस पूरे विवाद में कवि कुमार विश्वास की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने यूजीसी के नियम का विरोध किया है।

kumar vishvas opposed UGC act- India TV Hindi
कुमार विश्ववास ने किया यूजीसी का विरोध। Image Source : X (KUMARVISHVAS)/ANI

UGC के नए नियमों को लेकर यूपी से लेकर दिल्ली तक भयंकर सियासी बवाल  शुरू हो गया है। यूनिवर्सिटीज और कॉलेज कैंपस में जातिगत भेदभाव को दूर करने उद्देश्य से UGC ने नियमों में कुछ बदलाव किया है जिससे सवर्णों में भारी नाराजगी है। यूजीसी के नियमों के खिलाफ मंगलवार को बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। ऐसे में अब भारत के प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास भी यूजीसी के विरोध में उतर आए हैं।

क्या बोले कुमार विश्वास?

यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट किया और स्व० रमेश रंजन की एक कविता पोस्ट की। उन्होंने लिखा- “चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।” इसके साथ ही कुमार विश्वास ने  #UGC_RollBack भी इस्तेमाल किया है।

क्या है यूजीसी का नियम?

UGC को लेकर बवाल क्यों मचा है उसे समझने के लिए UGC एक्ट में जो बदलाव किए गए हैं वो समझिए। पहली बात तो ये है कि एक्ट बनाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। रोहित वेमुला केस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने Higher Educational Institutes में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए नियम-कानून बनाने को कहा। इसके बाद UGC ने नियमों में बदलाव किया.। सभी यूनीवर्सिटीज और कॉलेज में समता कमेटी बनाना कंपलसरी कर दिया। इस कमेटी के सामने कोई भी SC ST और OBC वर्ग के स्टूडेंट जातिगत भेदभाव के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। SC ST वर्ग के छात्र तो पहले भी जाति के आधार पर भेदभाव की शिकायत कर सकते थे लेकिन अब इसमें OBC वर्ग के स्टूडेंट्स को भी जोड़ दिया गया। कमेटी में SC ST और OBC का प्रतिनिधि रखना जरूरी है लेकिन सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधि हो ये जरूरी नहीं हैं। इसको लेकर विरोध है। सवर्णों की नाराजगी की दूसरी वजह ये है कि अगर कोई झूठी शिकायत करता है तो उसके खिलाफ क्या एक्शन होगा, इसका कोई प्रोविजन नए नियमों में नहीं हैं जबकि पहले ऐसा प्रोविजन था जिसे UGC ने खत्म कर दिया। इसलिए जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं कि उनका कहना है कि UGC ये मान कर के चल रहा है कि सवर्ण स्टूडेंट अत्याचारी होते हैं बाकी सारे पीड़ित।

क्या है विरोध करने वालों की मांग?

दरअसल, यूजीसी के एक्ट का विरोध करने वाले लोगों की मांग है कि भेदभाव किसी के भी खिलाफ हो उस पर एक्शन होना चाहिए। सवर्णों को भी सुदामा कोटा, भिखारी कहने वालों पर कार्रवाई हो। साथ ही अगर कोई झूठी शिकायत करता है, तो उसके लिए भी सजा का प्रोविजन हो। वहीं मामले में विपक्षी पार्टियों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का कहना है कि अगर सरकार भेदभाव वाले कानून लाएगी तो सड़क से सदन तक विरोध किया जाएगा।

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