ओडिशा के मलकानगिरी जिले में प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए मोटू इलाके में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाया। रविवार को चलाए गए इस अभियान में बुलडोजर के जरिए कई पक्के निर्माण ढहा दिए गए और सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया गया। जानकारी के मुताबिक, मोटू क्षेत्र के इस्लाम नगर में लगभग 20 सालों से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा था, जिसे हटाया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था के बीच चला बुलडोजर
एक स्थानीय प्रभावशाली व्यक्ति ने न सिर्फ जमीन पर घर बना लिया था, बल्कि वहां तालाब भी तैयार कर लिया थे। खेती भी की जा रही थी। इसको लेकर प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पुलिस बल की मौजूदगी में एक संयुक्त अभियान चलाया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे इलाके में बुलडोजर चलाया गया और अवैध निर्माणों को तोड़ दिया गया।
तीन मंजिला इमारत को किया गया ध्वस्त
अभियान के दौरान एक तीन मंजिला इमारत, पांच मकान और एक गोदाम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन ने साफ किया कि यह जमीन पूरी तरह सरकारी थी, जिस पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया था। कार्रवाई के बाद करीब 22 एकड़ से ज्यादा जमीन को दोबारा सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया।
मासूम खान ने कर रखा था अवैध कब्जा
स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस्लाम नगर क्षेत्र में करीब 22 एकड़ से अधिक वन भूमि पर भी कब्जा किया गया था। मासूम खान नाम के एक प्रभावशाली व्यक्ति ने इस जमीन पर कब्जा कर रखा था।
पुलिस प्रशासन रहा मौजूद
इस पूरे अभियान के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भारी मौजूदगी रही, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और इसका मकसद सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और सही उपयोग सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस बुलडोजर कार्रवाई के बाद इलाके में हलचल भी देखने को मिली है। लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
जानिए क्या बोला प्रशासन?
मलकानगिरी के सब कलेक्टर दुर्योधन भोई ने कहा, '2022 में अतिक्रमण केस हुआ था। बारीबाँझा गांव के मोहम्मद मासूम खान, मोहम्मद जमाल खान और मोहम्मद हसन खान ने मोटू तहसील के अंतर्गत बारीबाँझा गांव में 22 एकड़ 29 डिसमिल जमीन को गैरकानूनी तरीके से अपने कब्जे में रखा हुआ था। जमीन रेवेन्यू फॉरेस्ट की है। हमने जमीन को खाली करने के पर्याप्त अवसर दिए थे पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की प्रशासन बाध्य होकर जिलपाल के निर्देश पर हमारी एक टीम गई थी और प्रोसेस पूरा करने के बाद इविक्शन किया गया था। मौके पर लगभग 100 पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिसमें सीनियर पुलिस ऑफिशियल, एसडीपीओ, 2 थानों के प्रभारी और एसपी भी इसे सुपरवाइज कर रहे थे।'
शुभम कुमार की रिपोर्ट