चढ़ावे में चोरी पकड़े जाने के बाद अब राम मंदिर के प्रबंधन में आमूल परिवर्तन करने की तैयारी है। ट्रस्ट में नए सदस्य आएंगे, ट्रस्ट की डीड में बदलाव होगा क्योंकि वर्तमान bye-laws में किसी सीईओ की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं हैं। ट्रस्ट डीड में बदलाव करके CEO की नियुक्ति का प्रावधान जोड़ा जाएगा। ट्रस्ट के अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष के साथ साथ बाकी सदस्यों की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी। चोरी के खुलासे के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की लापरवाही भी सामने आई है। अब SBI के अलावा दूसरे बैंकों में भी चढ़ावे की रकम को रोटेशन के हिसाब से जमा करने की व्यवस्था की जाएगी। राम मंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ने वाले वकील के. पारासरन राम मंदिर ट्रस्ट के फाउंडिंग ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट के नियमों में बदलाव की जिम्मेदारी के. पारासरन को सौंपी गई है। पारासरन अपने सुझाव 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की मीटिंग में रखेंगे। उसी मीटिंग में तीन सदस्यों की कमेटी मंदिर के CEO के लिए तीन नामों का सुझाव देगी। CEO के नाम का फैसला इसी बैठक में होगा। राम मंदिर ट्रस्ट ने सिंधी समाज को चांदी की 200 ईंटों का रिकॉर्ड सबूतों के साथ भेज दिया है। विश्व सिंधी सेवा संगम के अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष राजू मनवानी ने 200 किलो चांदी की ईंटें 26 जनवरी 2021 को चंपत राय को सौंपी थीं लेकिन चढ़ावा में चोरी की खबरों के बाद राजू मनवानी ने चांदी की ईंटों को लेकर भी आशंकाएं जताई थी।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरि ने शुक्रवार को सिंधी सेवा संगम को चांदी की इन ईंटों के बारे में पूरी जानकारी दी। गोविन्द देव गिरि ने बताया कि चांदी की सारी ईंटे सुरक्षित हैं, चढ़ावे के रजिस्टर में एंट्री है, एक-एक किलो चांदी की दो सौ ईंटों को अगस्त 2024 में मिंट कॉरपोरेशन की हैदराबाद ब्रांच को भेजा गया था। वहां पर इन्हें गला कर 20-20 किलो की चांदी की ईंटों में ढाला गया और अब ये अयोध्या में स्टेट बैंक की शाखा के लॉकर में सुरक्षित रखी हैं। राजू मनवानी ने राम मंदिर ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया। राम मंदिर में अब CEO आ जाएगा, बैंक बदल जाएगा, विजिलैंस की व्यवस्था बढ़ा दी जाएगी, लूटने वालों से कैश की बरामदगी हो गई, चोरी के पैसे से खरीदी गई संपत्ति जब्त कर ली जाएगी, सोने की रामचरितमानस मिल गई, चांदी की सारी ईंटें सुरक्षित हैं। प्रभु राम के मंदिर में व्यवस्था पटरी पर आने लगी है। योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि अगले साल विधानसभा चुनाव में उनके विरोधी राम मंदिर में चोरी के मुद्दे का इस्तेमाल न कर पाएं।
क्या दलित वोटर्स मायावती से दूर हो रहे हैं?
लम्बे वक्त के बाद बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती सामने आईं। मायावती ने चन्द्रशेखर आजाद जैसे नेताओं को दलितों का दुश्मन बताया, कहा कि वोटों के चक्कर में कुछ लोग घड़ियाली आंसू बहाने दलितों के बीच पहुंच जाते हैं, उनके लिए करते तो कुछ नहीं, उल्टे गरीबों को कानूनी पचड़ों में फंसा कर गायब हो जाते हैं। मुद्दा था, मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या का। मेरठ के SSP ने भीम आर्मी के प्रदर्शनकारियों की पिटाई कर दी, उन्हें थप्पड़ मारे..शुक्रवार को चन्द्रशेखर आजाद रावण दलित लड़की के परिवार से मिलने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। दो घंटे बाद पुलिस ने उन्हें मेरठ में घुसने की इजाजत दी।
चन्द्रशेखर ने मायावती को जवाब दिया, कहा, अगर मायावती को दलितों के दर्द का वाकई एहसास होता तो घर में बैठकर बयान न देतीं, मेरठ में पीडित परिवार से मिलतीं। मेरठ में यूपी की बेटी की हत्या दुखद और निंदनीय है। इस पर सियासत होना स्वाभाविक है। मायावती को लगता है कि दलित वोट उनके हाथ से खिसकने लगा है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर चंद्रशेखर आजाद पर वार किया, पर मायावती की समस्या ये है कि वो सिर्फ लिखा हुआ बयान पढ़कर काम चलाना चाहती हैं। अब वो पब्लिक के बीच दिखाई नहीं देतीं और लोगों को भी सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए मना कर रही हैं। उनकी इस कमी का फायदा दूसरे दलित नेता उठा रहे हैं लेकिन मायावती बदलने को तैयार नहीं हैं।
क्या शरद पवार NDA में जाएंगे?
महाराष्ट्र में इस वक्त उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस के नेता जबरदस्त टेंशन में हैं क्योंकि चर्चा है कि शरद पवार NDA के साथ जा सकते हैं। गुरुवार को शरद पवार की डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात हो गई, पांच मिनट अकेले में बात हुई। इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया। बीजेपी के नेताओं ने कहना शुरू कर दिया कि शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे बड़े, सबसे सीनियर और सबसे सम्माननीय नेता हैं, अगर वो साथ आएंगे तो उनका स्वागत होगा। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भी कहा कि शरद पवार वक्त की नब्ज़ पहचानते हैं, अगर वो महायुति में आते हैं तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है।उद्धव ठाकरे की शिव सेना भड़क गई। संजय राउत ने कहा कि शरद पवार कहीं भी मीटिंग कर सकते थे, मंत्रालय में एकनाथ शिंदे के केबिन में जाने की क्या ज़रूरत थी। इस तरह की हरकतों से शरद पवार की विश्वसनीयता खत्म होती है।
संजय राउत ने कहा, अगर शरद पवार को गद्दारों के साथ बैठना है तो उन्हें अपने साथ हुए धोखे पर बात नहीं करनी चाहिए। एकनाथ शिंदे ने कहा, अगर कोई आपके घर आए तो उसका सम्मान करना महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा है। सीनियर लीडर शरद पवार आए तो उन्होंने वही किया जो उन्हें करना चाहिए था। आदित्य ठाकरे ने कहा राज्यसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने अपनी सीट शरद पवार के सम्मान में छोड़ दी थी, इसके बाद भी शरद पवार अगर एकनाथ शिंदे के साथ बैठेंगे तो दुख होना स्वाभाविक है। शरद पवार के हर पार्टी में दोस्त हैं, सब जगह उनके रिश्ते हैं, इसीलिए वो कहां बैठे, किसके साथ बैठे, ये मुद्दा नहीं होना चाहिए। लेकिन उद्धव सेना को तो शिंदे का नाम सुनते ही मिर्ची लग जाती है। उन्होंने ये भी नहीं सोचा कि शरद पवार वाकई में महाराष्ट्र के सबसे सीनियर और सबसे अनुभवी नेता हैं। उनकी प्रशासनिक क्षमता और राजनीति पर पकड़ दोनों कमाल की हैं। मुझे ये तो मालूम था कि पवार साहब कैसे प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए। कुर्सी सामने थी और वह चूक गए लेकिन ये आज पहली बार सुना कि वो राष्ट्रपति बनते बनते भी रह गए।
क्या मिलावट करने वालों को फांसी दी जानी चाहिए?
एक खबर आपको सावधान करने वाली है। ढाबों और रेस्त्रां में खाने के बाद आप जो सौंफ खाते हैं, वो मिलावटी और ज़हरीली हो सकती है। गुजरात के मेहसाणा में 26 हजार किलो जहरीली सौंफ ज़ब्त हुई। ये सौंफ देखने में हरी दिखती हैं लेकिन हकीकत में इसे जहरीले रंगों से रंगा गया था। मेहसाणा के ऊंझा इलाके की इस फैक्ट्री में सौंफ की सफाई होती थी, पैक करके पूरे देश में सप्लाई होती थी। अफसरों ने देखा कि बोरों में भरी सौंफ सड़ी हुई थी, उनमें फफूंद लग चुके थे, कीड़े पड़ चुके थे। जिन बोरों में सौंफ भरी गई थी, उन बोरों का रंग भी हरा हो गया था। कमरे की दीवारें हरे रंग में रंगी थी। जांच हुई तो पता लगा कि फैक्ट्री मालिक सड़ी हुई घटिया सौंफ खऱीद कर उसे कपड़ों को रंगने वाले हरे रंग से रंग देता था। कुछ दिन पहले अहमदाबाद के सौ से ज्यादा होटल्स और रेस्ट्रां पर रेड की गई। इन होटल्स में परोसे जाने वाली पनीर की जांच की गई...तो पता लगा कि किसी भी होटल में मिल्क पनीर का इस्तेमाल नहीं हो रहा था। सब्जियों को रंग कर बेचने की खबर अक्सर आती हैं, ये चिंता की बात है। दुनिया के कई देशों में इस तरह की हरकतें करने वालों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। इसी तरह का कानून हमारे देश में भी होना चाहिए। (रजत शर्मा)
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