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नहीं रहे राम मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास, कल दी जाएगी जल समाधि

 Reported By: Vishal Singh, Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Feb 12, 2025 09:23 am IST,  Updated : Feb 12, 2025 01:01 pm IST

87 वर्षीय महंत सत्येंद्र दास की ‘ब्रेन स्ट्रोक’ के कारण तबीयत बिगड़ जाने के बाद उन्हें लखनऊ के SGPGI में भर्ती कराया गया था। वह 6 दिसंबर, 1992 को अस्थायी राम मंदिर के पुजारी थे, जब बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया गया था। उनका पूरे अयोध्या और यहां तक कि उससे परे भी व्यापक सम्मान है।

satyendra das- India TV Hindi
महंत सत्येंद्र दास की फाइल फोटो Image Source : FILE PHOTO

श्री राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास का बुधवार, 12 फरवरी को निधन हो गया है। 87 वर्षीय सत्येंद्र दास की ‘ब्रेन स्ट्रोक’ के कारण तबीयत बिगड़ जाने के बाद उन्हें लखनऊ के SGPGI में रविवार को भर्ती कराया गया था। उन्हें मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर भी था। अस्पताल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि अयोध्या राम मंदिर के मुख्य पुजारी श्री सत्येंद्र दास जी ने आज अंतिम सांस ली। उन्हें 3 फरवरी को स्ट्रोक के कारण गंभीर हालत में न्यूरोलॉजी वार्ड के एचडीयू में भर्ती कराया गया था।

शिष्यों में शोक की लहर

महंत सत्येंद्र दास को कल दोपहर 12:00 बजे जल समाधि दी जाएगी। दास का पार्थिव शरीर उनके आवास पर पहुंचा है। लोग दर्शन कर रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास ने भी उनके अंतिम दर्शन किए। सत्येंद्र दास के शिष्यों में शोक की लहर है।

CM योगी ने जताया शोक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दास के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल X पर पोस्ट कर लिखा है, ''परम रामभक्त, श्री राम जन्मभूमि मंदिर, श्री अयोध्या धाम के मुख्य पुजारी आचार्य श्री सत्येन्द्र कुमार दास जी महाराज का निधन अत्यंत दुःखद एवं आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति है। विनम्र श्रद्धांजलि!''

सत्येंद्र दास कब बने थे पुजारी?

दास 6 दिसंबर, 1992 को अस्थायी राम मंदिर के पुजारी थे, जब बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया गया था। राम मंदिर के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्य पुजारी दास, जिन्होंने आध्यात्मिक जीवन का विकल्प चुना था, तब उनकी उम्र मात्र 20 वर्ष थी। उनका पूरे अयोध्या और यहां तक कि उससे परे भी व्यापक सम्मान है।

अयोध्या के सबसे सुलभ संत थे सत्येंद्र दास

निर्वाणी अखाड़े से संबंध रखने वाले दास अयोध्या के सबसे सुलभ संतों में से थे और अयोध्या तथा राम मंदिर के घटनाक्रमों के बारे में जानकारी चाहने वाले देश भर के कई मीडियाकर्मियों के लिए सुलभ रहने वाले व्यक्ति थे। छह दिसंबर, 1992 को जब बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया गया था, तब उन्हें मुख्य पुजारी के रूप में सेवा करते हुए मुश्किल से नौ महीने हुए थे। इस विध्वंस ने बड़े पैमाने पर राजनीतिक उथल-पुथल मचाई, जिसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी और दास हमेशा राम मंदिर आंदोलन और आगे के रास्ते पर मीडिया के सभी सवालों का धैर्यपूर्वक जवाब दिया करते। विध्वंस के बाद भी दास मुख्य पुजारी के रूप में बने रहे और जब रामलला की मूर्ति एक अस्थायी तम्बू के नीचे स्थापित की गई, तब उन्होंने पूजा भी की।

 

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