उत्तराखंड सरकार ने पेपर लीक मामले की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एक नई एसआईटी गठित करने का फैसला किया है। इस पेपर लीक मामले ने युवाओं को सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया था। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने बुधवार को घोषणा की कि सरकार ने 21 सितंबर को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की परीक्षा के प्रश्नपत्र के एक हिस्से के लीक होने की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने का फैसला किया है।
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मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने दी ये जानकारी
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने बुधवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार के लिए परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुचिता के साथ ही अभ्यर्थियों का हित सर्वोपरी है। इसी क्रम में गत रविवार को सम्पन्न परीक्षा में सामने आई शिकायतों की जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में गठित एसआईटी द्वारा कराई जाएगी। एसआईटी का कार्यक्षेत्र पूरा प्रदेश होगा।
हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज करेंगे निगरानी
मुख्य सचिव ने कहा कि जांच निष्पक्ष ढंग से हो इसके लिए यह भी एसआईटी जांच की निगरानी हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज के द्वारा की जाएगी। सेवानिवृत्त जज और एसआईटी सभी जिलों में जाएंगे। इस दौरान कोई भी व्यक्ति उन तक परीक्षा से संबंधित तथ्य और सूचना दे सकता है। उन्होंने बताया कि जांच एक माह में सम्पन्न की जाएगी। तब तक के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से परीक्षा के संबंध में आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
पेपर लीक जैसी घटनाएं रोकने पर जोर
उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच में दोषी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही विवादों के केंद्र में स्थित हरिद्वार के परीक्षा केंद्र पर जिस भी व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए छात्रों का हित सबसे ऊपर है। साथ ही यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि छात्रों और आमजन का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बना रहे।