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सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची उनकी पत्नी गीतांजलि, गिरफ्तारी को बताया गैर कानूनी

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Oct 03, 2025 09:27 am IST,  Updated : Oct 03, 2025 09:42 am IST

सोनव वांगचुक की रिहाई के लिए अब उनकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वांगचुक की पत्नी ने रिहाई के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है।

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो- India TV Hindi
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो Image Source : PTI

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा कि वांगचुक की गिरफ्तारी गैर कानूनी है। उनकी तुरंत रिहाई होनी चाहिए। यह याचिका अनुच्छेद 32 के तहत डाली गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट से सीधे हैबियस कॉर्पस (गलत तरीके से कैद किए व्यक्ति को रिहा कराने की मांग) की अपील की जाती है।

जोधपुर जेल में बंद हैं वांगचुक

वांगचुक को 24 सितंबर को लद्दाख में हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वे राजस्थान के जोधपुर जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हुई है।

झूठे आरोपों में फंसाया गया

पत्नी गीतांजलि आंगमो का कहना है कि वांगचुक को झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उन पर पाकिस्तान से संपर्क रखने का आरोप भी लगाया गया, जो कि गलत है।

राष्ट्रपति को लिखी तीन पन्नों की चिट्ठी

वहीं, दूसरी ओर आंगमो ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपने पति की रिहाई के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति को संबोधित तीन पृष्ठों के पत्र में वांगचुक की पत्नी ने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों से लोगों के हितों के लिए काम करने के कारण उनके पति को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह नहीं जानतीं कि उनके पति किस स्थिति में हैं।

बिना शर्त रिहाई का आग्रह

लेह के उपायुक्त के जरिए भेजे गए ज्ञापन में आंगमो ने कहा, 'हम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई का आग्रह करते हैं। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने देश की तो बात छोड़िए, किसी के लिए भी खतरा नहीं बन सकते। उन्होंने लद्दाख की धरती के वीर सपूतों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया है और हमारे महान राष्ट्र की रक्षा में भारतीय सेना के साथ एकजुटता से खड़े हैं।'

हिंसक झड़प में 4 लोगों की गई थी जान

वांगचुक को लेह शहर में हुई हिंसक झड़पों में 4 लोगों की मौत के दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांगों के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी।

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