1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की रिहाई की याचिका खारिज कर दी है। 10 दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अबू सलेम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अबू सलेम ने अग्रिम रिहाई की याचिका दायर की थी। इसमें दलील दी गई थी कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के समझौते के अनुसार उसकी सजा 25 साल से ज्यादा नहीं हो सकती और वह पहले ही इतना या उससे ज्यादा समय काट चुका है। हालांकि, उसकी दलील काम नहीं आई।
सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की। संयुक्त बेंच ने कहा, "आपको टाडा (आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां अधिनियम) के तहत सजा मिली है। आप समाज का कोई भला करने के लिए जेल में नहीं हैं।" कोर्ट ने कहा कि सजा की गणना और दस्तावेजों के आधार पर बॉम्बे हाई कोर्ट ही मामले की सुनवाई करे। अंतरिम जमानत या जल्द सुनवाई के लिए भी हाई कोर्ट में अपील करने को कहा। यह याचिका मुख्य रूप से रिहाई या जमानत से जुड़ी थी। हालांकि, फरवरी में हाईकोर्ट ने अलग मामले में अबू सलेम की याचिका खारिज की थी।
10 दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने अबू सलेम की इमरजेंसी पैरोल याचिका खारिज की थी, क्योंकि वह पुलिस एस्कॉर्ट चार्ज नहीं दे पाया था। पुलिस एस्कार्ट चार्ज के लिए उसे 17.60 लाख रुपये देने थे। वह अपने भाई की मौत के बाद अंतिम संस्कार और अन्य रीति रिवाज का हिस्सा बनने के लिए आजमगढ़ जाना चाहता था। इसके लिए उसे जमानत मिल सकती थी, लेकिन वह जमानत राशि देने में नाकाम रहा। इस वजह से उसकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई।
अबू सलेम 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित हुआ था और मुंबई ब्लास्ट में शामिल होने के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस ब्लास्ट में 250 से ज्यादा मौतें हुई थीं। यह फैसला उसके लिए बड़ा झटका है और वह अभी भी जेल में ही रहेगा।
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