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कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को मिली जमानत, टेरर फंडिंग मामले में हैं आरोपी

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Mar 12, 2026 12:32 pm IST, Updated : Mar 12, 2026 12:32 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग मामले में जमानत दे दी है। 2019 से जेल में बंद शाह को कुछ शर्तों के साथ राहत मिली है। NIA ने उन पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग में शामिल होने का आरोप लगाया था।

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Image Source : PTI FILE कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को गुरुवार को जमानत दे दी है। यह फैसला जम्मू-कश्मीर से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शब्बीर अहमद शाह की जमानत मंजूर की जा रही है। अदालत ने यह भी बताया कि जमानत पर विस्तृत आदेश कुछ शर्तों के साथ जल्द ही जारी किया जाएगा। इन शर्तों में क्या-क्या शामिल होगा, यह आदेश में स्पष्ट होगा। बता दें कि शब्बीर अहमद शाह पर NIA ने आरोप लगाया था कि वे आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग में शामिल थे।

व्यापारी परिवार में हुआ था शब्बीर का जन्म

बता दें कि शब्बीर शाह का जन्म 14 जून 1953 को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कादीपोरा गांव में एक व्यापारी परिवार में हुआ था। उनके पिता गुलाम मोहम्मद वरियर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर थे, जिनकी 1989 में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। शाह की राजनीतिक जिंदगी बहुत कम उम्र से शुरू हो गई। साल 1968 में सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने भारत सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 3 महीने कैद में रखा गया। इसके बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ यंग मेन लीग बनाई, लेकिन बार-बार गिरफ्तारियां होती रहीं, जिससे उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई।

जेल में अलगाववादी नेताओं के संपर्क में आए

शब्बीर शाह ने श्रीनगर की सेंट्रल जेल में कई अलगाववादी नेताओं के संपर्क में आए। 1974 में उनके साथियों ने जम्मू कश्मीर पीपुल्स लीग बनाई। 1998 में शब्बीर शाह ने JKDFP की स्थापना की। वह 1968 से लगातार जेल, हिरासत और घर में नजरबंदी का सामना करते रहे हैं। कई बार उन्हें डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स और अन्य कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया। 1975 में इंदिरा-शेख समझौते का विरोध करने पर भी उन्हें जेल हुई थी। 1988-89 में वह भूमिगत रहे, लेकिन 1989 में गिरफ्तार हो गए। 2017 में उन्होंने सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाली तहरीक-ए-हुर्रियत से सचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।

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