1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका, खारिज किया रिव्यू पिटीशन

उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका, खारिज किया रिव्यू पिटीशन

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Amar Deep
 Published : Apr 20, 2026 06:53 pm IST,  Updated : Apr 20, 2026 07:13 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद के रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है। उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी जिसमें कोर्ट ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया रिव्यू पिटीशन।- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया रिव्यू पिटीशन। Image Source : PTI/FILE

इस वक्त की बड़ी खबर राजधानी दिल्ली से आ रही है। यहां सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को बड़ा झटका दिया है। उमर खालिद की रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी गई है। बता दें कि उमर खालिद ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के ही उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें उसे दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में जमानत देने से इनकार किया गया था। फिलहाल उमर खालिद के रिव्यू पिटीशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फैसले की समीक्षा करने का कोई आधार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी जमानत

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी उमर खालिद को जमानत देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद उमर खालिद ने यह रिव्यू पिटीशन दाखिल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह देखते हुए कि 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे की साजिश के संबंध में उमर खालिद के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विश्वास करने के लिए उचित आधार है, जमानत देने से इंकार कर दिया था। 

उमर खालिद और शरजिल इमाम को नहीं मिली थी जमानत

इससे पहले पांच जनवरी को, उमर खालिद के अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन पांच अन्य को यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि सभी आरोपी एक समान स्थिति में नहीं हैं। कोर्ट ने मुकदमे में देरी के उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा था कि खालिद और इमाम, जो 2020 से जेल में बंद हैं, संरक्षित गवाहों की जांच के बाद या आदेश पारित होने के दिन से एक वर्ष बाद नई जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा था कि UAPA के तहत खालिद और इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, और अभियोजन सामग्री से पता चलता है कि वे दंगों की "साजिश रचने, लामबंदी करने और रणनीतिक निर्देशन" में शामिल थे।

क्या हैं कोर्ट के नियम?

कोर्ट के नियमों के अनुसार, रिव्यू पिटीशन पर उन न्यायाधीशों द्वारा विचार किया जाता है, जिन्होंने किसी स्पष्ट त्रुटि या सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के परिणामस्वरूप हुए गंभीर अन्याय को दूर करने के लिए चैंबर में निर्णय सुनाया हो या आदेश पारित किया हो। पुनर्विचार का अनुरोध करने वाले पक्ष न्यायाधीशों से खुली अदालत में सुनवाई का अनुरोध कर सकते हैं ताकि विचाराधीन निर्णय के कारण हुए गंभीर अन्याय को दूर किया जा सके। 

यह भी पढ़ें-

नालासोपारा में 40 फीट गहरे कुएं में गिर गई कार, फिर भी कैसे बच गई जान, जानिए

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत