Saturday, April 20, 2024
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29 फरवरी तक टला किसानों का ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन, किसान संगठन ने बताया आगे का प्लान

किसान संगठनों ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी अगली रणनीति की जानकारी दी। 27 फरवरी को किसान संगठनों की बैठक होगी और फिर 29 फरवरी को वो अपने अगले कदम के बारे में बताएंगे। किसान संगठनों ने ये भी आरोप लगाए कि हरियाणा पुलिस ने अत्याचार किया है।

Khushbu Rawal Edited By: Khushbu Rawal @khushburawal2
Published on: February 23, 2024 22:41 IST
farmers protest- India TV Hindi
Image Source : PTI किसानों ने खनेरी बॉर्डर पर मारे गए युवक को श्रद्धांजलि दी।

चंडीगढ़: किसान नेताओं ने शुक्रवार को कहा कि वह अपने ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन को लेकर अगले कदम के बारे में 29 फरवरी को फैसला करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि शनिवार को ‘कैंडल मार्च’ निकाला जाएगा और उसके दो दिन बाद वे केंद्र का पुतला फूंकेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) ने शुक्रवार शाम को यह निर्णय लिया। दोनों संगठन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गांरटी सहित विभिन्न मांगों को लेकर किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान हरियाणा और पंजाब के बीच शंभू और खनौरी सीमा पर डेरा डाले हुए हैं

24 फरवरी को ‘कैंडल मार्च’ निकालेंगे किसान

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने खनौरी सीमा पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘आंदोलन के तहत अगले कदम की घोषणा 29 फरवरी को की जाएगी।’’ उन्होंने घोषणा की कि वे 24 फरवरी को ‘कैंडल मार्च’ निकालेंगे और 26 फरवरी को केंद्र का पुतला फूंकेंगे। किसान नेताओं ने खनौरी में झड़प में एक प्रदर्शनकारी की मौत और लगभग 12 पुलिस कर्मियों के घायल होने के बाद बुधवार को ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन को दो दिनों के लिए रोक दिया था। उक्त घटना तब हुई जब किसानों ने अवरोधकों को तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की।

क्या हैं किसानों की मांगें?

फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों के साथ खनौरी और शंभू सीमा पर डेरा डाले हुए हैं। पंजाब के किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने, पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लेने, 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘न्याय’, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 के आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग कर रहे हैं। (भाषा)

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