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कर्नाटक मामले के बाद, चुनाव आयोग की 'निष्पक्षता' में विश्वास खत्म: शिवसेना

 Reported By: IANS
 Published : Mar 29, 2018 07:43 pm IST,  Updated : Mar 29, 2018 07:43 pm IST

शिवसेना ने कहा, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन विवाद के बाद देश ने चुनाव आयोग पर पहले ही विश्वास खो दिया था। कर्नाटक प्रकरण के बाद, चुनाव आयोग पर बचा-खुचा विश्वास भी समाप्त हो गया...

uddhav thackeray- India TV Hindi
uddhav thackeray

मुंबई: सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सहयोगी शिवसेना ने गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा की तारीख कथित रूप से आधिकारिक घोषणा के पहले ही लीक हो जाने के बाद चुनाव आयोग की 'निष्पक्षता' पर सवाल उठाए हैं। शिवसेना ने कहा, "इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विवाद के बाद देश ने चुनाव आयोग पर पहले ही विश्वास खो दिया था। कर्नाटक प्रकरण के बाद, चुनाव आयोग पर बचा-खुचा विश्वास भी समाप्त हो गया।"

पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' और 'दोपहर का सामना' में संपादकीय में कहा, "भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के किसी अमित मालवीय ने कर्नाटक चुनाव की तारीख की घोषणा पहले ही कर चुनाव आयोग के उस संवाददाता सम्मेलन की हवा निकाल दी जिसमें तारीख की आधिकारिक रूप से घोषणा होनी थी।"

संपादकीय के अनुसार, "जब टी. एन. शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे, उन्होंने दिखाया था कि चुनाव आयोग के पास 'रीढ़' है। लेकिन, इनके पहले और इनके बाद 'रीढ़ की हड्डी' का अभाव दिखा।" शिवसेना ने कहा, "इसके पीछे वजह यह है कि जो चुनाव आयोग के प्रमुख होते हैं, वह राजनीति में शामिल हो जाते हैं, राज्यसभा के लिए चुने जाते हैं, मंत्री या राज्यपाल बन जाते हैं। इसी तरह का मामला सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों के प्रधान-मुख्य न्यायाधीशों के साथ है।"

शिवसेना ने कहा, "निष्पक्षता का कोई लक्षण नहीं है। किसी हैसियत में रहने के दौरान 'पैमाने बदलने के लिए' इनाम दिए जाते हैं। चुनाव आयोग से लेकर अब न्यायालयों तक, उन लोगों पर संदेह उठते हैं जिनकी नियुक्ति होती है, खासकर एक खास राज्य के उम्मीदवारों पर। यह देश में ईमानदारी के लिए घातक है।"

शिवसेना ने लिखा है, "जब से यह सरकार आई है, इसने बिना किसी क्षमता वाले अपनी मानसिकता के लोगों को देश के कानून प्रशासन, शिक्षा और चुनाव विभागों पर थोपा है जिससे इनकी साख की दुर्गति बन गई है।"

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