बेंगलुरु: कर्नाटक में गुरुवार को कांग्रेस की सरकार ने सत्ता में अपने ढाई साल पूरे कर लिए और 21 नवंबर को यानी आज सुबह डिप्टी CM और KPCC अध्यक्ष डीके शिवकुमार के एक सोशल मीडिया पोस्ट से कर्नाटक का राजनीतिक पारा चढ़ गया। डीके शिवकुमार ने अपने पोस्ट में लिखा है कि मेहनत करने वालों को उसका फल जरूर मिलता है। भक्ति करने वालों को भगवान जरूर मिलते हैं। हालांकि इस पोस्ट में वो आगे पार्टी कार्यकर्ताओं को अधिकार देने की वकालत कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को उनका पूरा अधिकार दिया। लेकिन उनकी इस पोस्ट की टाइमिंग के सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं।
डीके शिवकुमार को CM बनाने की मांग क्यों उठी?
डीके शिवकुमार कैंप का कहना है कि ढाई साल बाद डीके शिवकुमार को CM बनाने का वादा किया गया था। डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने इशारों में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि CM सिद्धारमैया अपना वादा निभाएंगे। वहीं, सिद्धारमैया ने कुर्सी छोड़ने की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है। दरअसल, पिछले सप्ताह दिल्ली गए डीके शिवकुमार की राहुल गांधी से मुलाकात ही नहीं हो पाई। सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार ने राहुल गांधी को मैसेज भी किया लेकिन राहुल गांधी से कोई जवाब नहीं मिला।
सिद्धारमैया ने कुर्सी छोड़ने से किया इनकार
पिछले 2 दिन में कांग्रेस के 6 से 7 विधायक दिल्ली पहुंचे। ये सभी डीके शिवकुमार के समर्थक माने जाते हैं। इसे पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सिद्धारमैया कैंप का दावा है कि अधिकांश विधायकों का सपोर्ट उनके साथ है इसीलिए उनकी कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। चामराजनगर जिले में गुरुवार को एक कार्यक्रम में सिद्धारमैया ने इस बात को दोहराया कि वे पूरे कार्यकाल तक CM बने रहेंगे।
दलित नेता बना रहे अलग स्ट्रैटेजी
दूसरी ओर, पार्टी के दलित नेता भी एक समूह बनाकर पिछले कुछ दिनों से समय-समय पर मीटिंग कर रहे हैं। ऐसी ही एक मीटिंग मंत्री सतीश जारकीहोली के घर पर हुई जिसमें गृहमंत्री जी परमेश्वर, नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा और पूर्व मंत्री केएन राजन्ना शामिल हुए। राजन्ना CM सिद्धारमैया के खास माने जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में इस बात पर मुख्य रूप से चर्चा हुई कि अगर किसी दबाव में आकर पार्टी आलाकमान CM सिद्धारमैया से पद छोड़ने को कहता है तो उस सूरत में CM किसी दलित नेता को बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस आलाकमान कब तोड़ेगा चुप्पी?
गौरतलब है कि सिद्धारमैया, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों के लिए संघर्ष करने वाले नेता के तौर पर जाने जाते हैं। ऐसे में उन्हें हटाकर डीके शिवकुमार जैसे वोक्कालिगा लीडर को CM बनाने से पार्टी को 2028 के चुनावों में भारी नुकसान होगा, ऐसा इन नेताओं का मत है। मीटिंग में इस बात पर भी सहमति बनी है कि इस मामले में आलाकमान को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सार्वजनिक तौर पर इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।
कैबिनेट में फेरबदल की सोच रहे सिद्धारमैया
इधर, CM सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल की जुगत में लगे हुए हैं। ऐसा करके वो अपनी कुर्सी को ज्यादा समय तक बचाए रख सकते हैं। हालांकि, सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने फिलहाल CM को कैबिनेट में फेरबदल की अनुमति नहीं दी है। बिहार में बुरी हार के बाद पार्टी आलाकमान ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जिससे कर्नाटक में पार्टी को नुकसान हो। सिद्धारमैया एक मास अपील वाले नेता हैं और इस समय उन्हें हटाने से पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है, इसीलिए पार्टी आलाकमान ने यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है।
क्या बढ़ रही है डीके शिवकुमार की नाराजगी?
लेकिन मियाद के गुजर जाने के बाद डीके शिवकुमार की नाराजगी धीरे-धीरे बढ़ती हुई दिख रही है। डीके शिवकुमार के भाई, डीके सुरेश ने CM सिद्धारमैया से वादा पूरा करने की बात कही तो सिद्धारमैया के करीबी और पूर्व मंत्री केएन राजन्ना ने इशारों में डीके शिवकुमार पर वादा खिलाफी का आरोप लगा दिया।
हालांकि, डीके शिवकुमार ने उनके समर्थक विधायकों के दिल्ली जाने की बात पर कहा कि उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं है, वो अभी भी यही कहते नजर आए कि पार्टी ने सिद्धारमैया को CM पद की जिम्मेदारी सौंपी है और वो साथ मिलकर काम करेंगे। इतना तो साफ है कि ढाई साल पूरे होने के साथ ही कांग्रेस के भीतर सियासी उठापटक शुरू हो गई है, आलाकमान की चुप्पी इसे और भी हवा दे रही है।
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