Highlights
- JDU अध्यक्ष ललन सिंह ने किया बड़ा दावा
- दिए समाजवादी पार्टी से गठबंधन के संकेत
- भाजपा को यूपी में 20 सीटों पर समेटने का दावा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव का गठजोड़ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में ताकतवर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मात दे सकता है। जनता दल-यूनाइटेड (JDU) ने शनिवार को यह बात कही। जदयू अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन ने यहां यह दावा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि वास्तविक नेता नीतीश कुमार अगला लोकसभा चुनाव पड़ोसी राज्य में लड़ें।
Related Stories
सपा के साथ गठजोड़ के दिए संकेत
JDU प्रमुख ने कहा, ‘‘लोकसभा चुनाव उम्मीदवार के रूप में हमारे मुख्यमंत्री के लिए सबसे उत्साही मांग फूलपुर से आई है। इसी तरह की मांग अंबेडकर नगर और मिर्जापुर के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई है। चुनाव एक साल से अधिक दूर हैं, इसलिए हम ऐसी मांगों को स्वीकार या अस्वीकार करने के संदर्भ में अभी नहीं सोच रहे हैं।’’ हालांकि, उन्होंने पर्याप्त संकेत दिए कि उनकी पार्टी मुलायम सिंह यादव द्वारा स्थापित सपा के साथ गठजोड़ करना चाहेगी, जिनसे कुमार अपनी हालिया दिल्ली यात्रा के दौरान मिले थे।
भाजपा को 20 सीटों पर समेटने का दावा
जदयू अध्यक्ष ललन ने कहा, ‘‘विपक्षी एकता के लिए हमारे नेता के अभियान की लहर चल रही है। हालांकि, वह बिहार की सभी 40 लोकसभा सीट में से किसी से भी चुनाव लड़ने का फैसला कर सकते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश से उठ रही मांगें उनकी राष्ट्रीय पहल के बारे में चर्चा का संकेत हैं।’’ ललन ने कहा कि अगर नीतीश और अखिलेश (पूर्व मुख्यमंत्री और मुलायम सिंह यादव के बेटे) एकसाथ आते हैं, तो साल 2019 में यूपी में 65 लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा को 20 से कम सीट मिल सकती है।
"नीतीश प्रधानमंत्री पद के लिए विकल्प बन सकते हैं"
वहीं इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में उभरने की चर्चा के बीच, उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने शुक्रवार को कहा कि अगर अन्य दल चाहें तो वह एक विकल्प हो सकते हैं। जद (यू) अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि कुमार का मुख्य ध्यान 2024 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने पर है। उन्होंने कहा कि वह अगले सप्ताह बिहार विधानसभा में विश्वास मत के बाद विभिन्न दलों के नेताओं से मिलने के लिए राष्ट्रीय राजधानी का दौरा करेंगे।