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तमिलनाडु चुनाव: 'हां मैं करुणानिधि से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता हूं', स्टालिन ने जारी किया वीडियो

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Apr 21, 2026 08:12 am IST,  Updated : Apr 21, 2026 08:49 am IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा, हां, मैं करुणानिधि से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता हूं। जानें उन्होंने ऐसा क्यों कहा है?

एम के स्टालिन- India TV Hindi
एम के स्टालिन Image Source : MK STALIN/'X

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा, "2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान, कुछ लोगों ने कहा था कि स्टालिन करुणानिधि से भी ज्यादा खतरनाक हैं। मेरी तुलना करुणानिधि से कभी नहीं की जा सकती। उन्हें पिता कहने से भी बढ़कर, मैंने हमेशा उन्हें अपना नेता माना है। जब वे कहते हैं कि मैं ऐसे नेता (करुणानिधि) से भी ज्यादा खतरनाक हूं, तो मेरे मन में एक ही बात आती है: जो भी तमिलनाडु के साथ विश्वासघात करने और हमारी प्रगति में बाधा डालने की कोशिश करेगा, मैं हमेशा उसके लिए खतरनाक रहूंगा। अगर मुझे अपने नेता से एक कदम आगे माना जाता है, तो मुझे इस पर गर्व है, क्योंकि यह भावना तमिलों के खून में है..."

(स्रोत: एमके स्टालिन/'एक्स')


चेन्नई के कन्नागी नगर में मंगलवार की सुबह के प्रचार अभियान के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री और कोलाथुर से डीएमके उम्मीदवार एमके स्टालिन से मिलने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। सीएम से मिलने के लिए लोगों में होड़ लगी रही। लोगों का उत्साह चरम पर था। भीड़ में कुछ लोगों ने हाथों में लाल काले बैलून थाम रखे थे।

देखें वीडियो



तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और कोलाथुर से डीएमके उम्मीदवार एमके स्टालिन ने चेन्नई के कन्नागी नगर में अपने सुबह के प्रचार अभियान के दौरान लोगों से बातचीत की। काफी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचे थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। 

तमिलनाडु परिसीमन के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा

सोमवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए स्टालिन ने लोगों से कहा कि भाजपा द्वारा दक्षिणी राज्यों (विशेष रूप से तमिलनाडु जहां चुनाव होने वाले हैं) को निशाना बनाकर परिसीमन के लिए आक्रामक रूप से दबाव बनाने की राजनीति थी जिसमें केंद्र सरकार को हार का सामना करना पड़ा, ये सब फासीवादी मानसिकता को दर्शाता है।

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