जम्मू-कश्मीर में ‘वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम के दूसरे चरण के तहत आठ जिलों के 43 सीमावर्ती ब्लॉक में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 124 गांवों के केंद्रित विकास के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार की गयी है। रविवार को एक प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 की प्रगति और कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में यह जानकारी साझा की गई। उन्होंने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश और जिला स्तर पर नोडल विभागों, अधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा स्क्रीनिंग समितियों के गठन के साथ एक मजबूत संस्थागत ढांचा स्थापित किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि इस कार्यक्रम के दायरे में उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती बारामूला, बांदीपोरा और कुपवाड़ा जिले तथा जम्मू संभाग के सांबा, जम्मू, कठुआ, राजौरी व पुंछ जिले आते हैं। प्रवक्ता ने बताया कि रूपरेखा में चिकित्सा शिविरों का आयोजन, जागरूकता अभियान और पर्यटन पहल शामिल हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना व राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करना है।
जम्मू और कश्मीर में सोमवार को पहली बार चूना पत्थर के कुल सात ब्लॉक की नीलामी की जाएगी। खान मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा, “ यह केंद्र शासित प्रदेश में खनन ब्लॉक की पहली नीलामी भी है, जो पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धात्मकता और खनिज क्षेत्र में सतत विकास की दिशा में बदलाव को दर्शाती है।” इन खनिज भंडारों को जी3 और जी4 अन्वेषण चरणों के तहत वर्गीकृत किया गया है। खान मंत्रालय ने कहा, “जम्मू- कश्मीर में चूना पत्थर खनिज खंडों की यह पहली नीलामी 24 नवंबर 2025 को जम्मू में औपचारिक रूप से शुरू होगी।” इस कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी करेंगे। (इनपुट- पीटीआई भाषा)
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