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शॉकिंग! नियुक्ति पत्र मिला तो खुशी से झूमे, लेकिन अगले ही दिन थमा दिया रिटायरमेंट

 Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Jun 30, 2026 03:33 pm IST,  Updated : Jun 30, 2026 03:34 pm IST

झारखंड के सरकारी स्कूलों में चल रही शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया काफी चर्चा में है क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया के बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिन्होंने नियुक्ति की खुशी के साथ व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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नियुक्ति पत्र के साथ नंदलाल रवानी। Image Source : REPORTER INPUT

रांची: झारखंड में 26,000 सहायक आचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया इस समय चर्चा के केंद्र में है। जहां एक तरफ नए शिक्षकों की बहाली से शिक्षा विभाग में उत्साह है, वहीं कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जो न केवल हैरान करती हैं, बल्कि सरकारी प्रक्रिया की सुस्ती पर भी सवाल खड़े करती हैं। राज्य में कई ऐसे शिक्षक हैं जिनका करियर नियुक्ति पत्र मिलते ही शुरू हुआ और 24 घंटे के भीतर ही खत्म भी हो गया।

कुर्सी पर बैठने से पहले ही हो गए रिटायर

जामताड़ा जिले के नंदलाल रवानी की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। नंदलाल को 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला, लेकिन संयोग देखिए कि 30 जून 2026 को ही उनकी आयु 60 वर्ष पूरी हो गई। सरकारी नियम के अनुसार, 60 वर्ष पूरे होते ही शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाते हैं। नतीजा यह हुआ कि नंदलाल नियुक्ति पत्र लेकर घर पहुंचे और अगले ही दिन उन्हें रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़ा होना पड़ा।

नंदलाल की दर्दनाक कहानी

नंदलाल का कहना है कि वे 2006 से पारा शिक्षक (Para Teacher) के रूप में सिस्टम का हिस्सा रहे हैं। 2016 में पात्रता परीक्षा पास की और सालों से इस दिन का इंतजार था, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में लगी देरी ने उनसे उनका पूरा कार्यकाल छीन लिया। बता दें कि पारा शिक्षक ऐसे संविदा कर्मी होते हैं जिन्हें प्राथमिक या माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए नियुक्त किया जाता है। इन्हें शिक्षा मित्र या सहायक अध्यापक के नाम से भी जाना जाता है।

सिस्टम की विडंबना: कोई नौकरी पाकर रोया, तो कोई रिटायरमेंट के बाद बना 'शिक्षक'

हालात इतने अजीब हैं कि कुछ शिक्षकों को तो नियुक्ति पत्र तब मिला, जब वे पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मो. नियूम अंसारी जैसे कई मामले ऐसे हैं जहां शिक्षक पहले ही सेवामुक्त हो गए, लेकिन कागजी कार्रवाई में हुई देरी के कारण उन्हें रिटायरमेंट के बाद नियुक्ति पत्र थमाया गया।

क्या कहती है प्रक्रिया?

राज्य में सहायक आचार्यों के लिए 50% सीटें पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित हैं। आयु सीमा में छूट के प्रावधान होने के बावजूद, नियुक्ति प्रक्रिया में सालों का समय बीतने के कारण कई अभ्यर्थी 60 साल की उम्र की दहलीज पर पहुंच गए।

(रिपोर्ट- मुकेश सिन्हा)

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