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मुठभेड़ से भागी माओवादी महिला ने किया सरेंडर, संगठन के खोले राज; UAPA के तहत दर्ज हैं मामले

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Apr 28, 2025 10:37 pm IST,  Updated : Apr 28, 2025 11:40 pm IST

मुठभेड़ से भागी एक 22 वर्षीय माओवादी सुनिता मुर्मू ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उसने कहा कि दस्ते में शामिल होते ही उसे यह एहसास हो गया था कि उसने बहुत बड़ी गलती की है।

माओवादी सुनिता मुर्मू ने पुलिस के समक्ष किया सरेंडर - India TV Hindi
माओवादी सुनिता मुर्मू ने पुलिस के समक्ष किया सरेंडर

बोकारो: झारखंड पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर राज्य में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 21 अप्रैल को बोकारो जिले के लूगु पहाड़ क्षेत्र में एक बड़ी मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में केंद्रीय माओवादी कमेटी के सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक समेत 8 नक्सली मारे गए। मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार, गोलियां और अन्य सामग्री बरामद की। यह ऑपरेशन झारखंड पुलिस, 209 कोबरा, बोकारो पुलिस, झारखंड जगुआर और सीआरपीएफ के संयुक्त प्रयास से चलाया गया था, जिसे "डाकाबेड़ा" नाम दिया गया था।

मुठभेड़ में भागी, अब किया सरेंडर

इस मुठभेड़ के दौरान संगठन की एक महिला सदस्य सुनिता मुर्मू उर्फ लीलमुनी मुर्मू भागने में सफल रही थी। लेकिन माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व के मारे जाने और झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सुनिता ने 28 अप्रैल को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बोकारो में पुलिस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष सरेंडर कर दिया।

न्यायिक हिरासत में रही थी 3 साल

22 वर्षीय सुनिता मुर्मू, दुमका जिले के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के अमरपानी गांव की निवासी है, जिसका आपराधिक इतिहास रहा है। पूर्व में वह गिरिडीह जेल में तीन साल तक न्यायिक हिरासत में रही थी। सुनिता पर महुआटांड और खुखरा थानों में आर्म्स एक्ट, विस्फोटक अधिनियम और यूएपीए के तहत कई मामले दर्ज हैं।

सुनिता मुर्मू का खुलासा

आत्मसमर्पण के बाद सुनिता ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि माओवादी संगठन के लोग उसे घर से कोर्ट ले जाने के बहाने पहाड़ की ओर ले गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसे यह एहसास हुआ कि वह गलत रास्ते पर आ गई है। उसने बताया कि वह लूगु पहाड़ क्षेत्र के दस्ते में शामिल हुई थी और मुठभेड़ के बाद जान बचाकर जंगलों में भटकती रही। किसी तरह वह एक ट्रेन पकड़कर बोकारो आई और फिर पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया।

सुनिता ने यह भी बताया कि माओवादी दस्ते में शामिल होते ही उसे यह एहसास हो गया था कि उसने बहुत बड़ी गलती की है। झारखंड पुलिस ने सुनिता के आत्मसमर्पण को नक्सल उन्मूलन अभियान में महत्वपूर्ण सफलता बताया।

(रिपोर्ट- मृत्युंजय मिश्रा)

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