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...तो माइग्रेन होने का यह भी हैं एक कारण

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Oct 20, 2016 01:58 pm IST,  Updated : Oct 20, 2016 01:58 pm IST

अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के सान डीएगो के अध्ययन के प्रथम लेखक एंटोनियो गोंजालेज ने कहा, "यह विचार वहां से आया कि कुछ भोज्य पदार्थ माइग्रेन की शुरुआत करते हैं- चॉकलेट, शराब और विशेष रूप से नाइट्रेट वाले खाद्य पदार्थ।"

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हेल्थ डेस्क: माइग्रेन में कभी सिर के दाएं तो कभी बाएं हिस्से में अचानक उठने वाला दर्द को कहा जाता है। जिसे हम माइग्रेन कहते हैं गर्मी, मानसिक तनाव और कम नींद के कारण होने वाली यह समस्या पुरुषों की बजाए महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। इस रोग की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें दिन में अचनाक कभी भी तेज दर्द उभर आता है जो कई बार 3 से 4 घंटे तक बना रहता है। कभी-कभी ये दिनों में बदल जाता है।

एक शोध में ये बात सामने आई कि माइग्रेन का संबंध हमारे मुंह में पाएं जाने वाले सूक्ष्म जीवों से भी है।

माइग्रेन से पीड़ित लोगों के मुंह में सूक्ष्मजीवों की संख्या ज्यादा होती है, जो नाइट्रेट को परिवर्धित करने की अपेक्षाकृत अक्षिक क्षमता रखते हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के सान डीएगो के अध्ययन के प्रथम लेखक एंटोनियो गोंजालेज ने कहा, "यह विचार वहां से आया कि कुछ भोज्य पदार्थ माइग्रेन की शुरुआत करते हैं- चॉकलेट, शराब और विशेष रूप से नाइट्रेट वाले खाद्य पदार्थ।"

गोंजालेज ने पाया, "हमने सोचा कि शायद लोगों के खाने का संबंध, उनके सूक्ष्मजीवों और उनके माइग्रेन से है।"

नाइट्रेट ऐसे खाद्य पदार्थो, जैसे प्रसंस्कृत मांस और हरे पत्तेदार सब्जियों और कुछ निश्चित दवाओं में पाया जाता है। मुंह में पाए जाने वाले जीवाणुओं से नाइट्रेट को कम किया जा सकता है।

यह जब खून में संचारित होता है तो कुछ स्थितियों के तहत नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाता है। नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त प्रवाह में सुधार और रक्तचाप को कम कर हृदय की सेहत में सहायक होता है।

हालांकि मोटे तौर पर चार-पांच दिल के मरीजों में जो नाइट्रेट युक्त दवाएं सीने के दर्द और हृदयाघात की दिक्कतों के लिए लेते हैं, उनमें सिरदर्द की शिकायतें एक प्रभाव के पक्ष के रूप में देखा गया है।

इसे ठीक से जानने के लिए शोधकर्ताओं ने स्वस्थ व्यक्तियों के मुंह के नमूने जीवाणु के 172 नमूने और 1,996 मल के नमूने लिए।

इससे पहले प्रतिभागियों ने माइग्रेन से जुड़े सर्वेक्षण में खुद के पीड़ित होने या नहीं होने की जानकारी दी थी।

जीवाणुओं के जीन अनुक्रमण में पाया कि माइग्रेन से पीड़ित और गैर माइग्रेन वाले लोगों में इनकी मात्रा अलग-अलग थी। पीड़ित लोगों में जीवाणुओं की संख्या ज्यादा थी।

यह अध्ययन 'एमसिस्टम्स' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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