
अग्रवाल ने कहा, "आज की तारीख में पुरुष हों या स्त्री हर कोई इसका शिकार हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण लोगों में बढ़ता तनाव है। हालांकि तनाव केवल थायरॉइड ही नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों जैसे रक्तचाप, मधुमेह तथा अवसाद का भी कारण है। इसके अलावा, लोगों के जंक फूड के आदी होने से भी उनकी थायरॉइड गं्रथि के अनियंत्रित होने की संभावना रहती है।"
सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म के लक्षण आमतौर पर हाइपोथायरॉइडिज्म जैसे ही होते हैं।
अग्रवाल के मुताबिक, "शुरुआती दौर में इस बीमारी के लक्षण सामने नहीं आते। समय बीतने के बाद धीरे-धीरे जब बीमारी बढ़ती है, तो इसके लक्षणों का दिखना शुरू होता है। मरीज को कमजोरी, थकान, वजन बढ़ना, अवसाद, बेचैनी, बाल झड़ना, पेशियों की क्षमता में कमी, पुरुषों में इरेक्टाईल डिस्फंक्शन और यौनेच्छा में कमी महसूस होती है।"
ऐसे करें बचाव
बीमारी के इलाज के बारे में अग्रवाल ने कहा, "सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या गर्भावस्था या किन्हीं अन्य परिस्थितियों के दौरान भी सामने आ सकती है, जिसका पता टी3, टी4 तथा टीएसएच हॉर्मोन की जांच से चलता है। ऐसे मरीज कुछ दिनों तक दवा के सेवन के बाद पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर यह बीमारी सामान्य अवस्था में हो, तो मरीज को लंबे वक्त तक दवा का सेवन करना पड़ता है। अक्सर उन्हें जीवनभर दवाएं लेनी पड़ती हैं।"
बीमारी से बचाव के बारे में अग्रवाल ने कहा, "इस बीमारी के कारणों का ठीक-ठीक पता नहीं चल पाया है। हालांकि तनाव से दूर रहना, स्वस्थ व सक्रिय जीवनशैली तथा संतुलित भोजन हमें हर तरह की बीमारी से बचाने में काफी हद तक मददगार साबित होता है। इसके लिए कोई खास एहतियात बरतने की जरूरत नहीं है। हां एक बात गौर करने लायक है कि अगर आपके परिवार में किसी को थायरॉइड से संबंधित बीमारी हो, तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है।"