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हर वक्त चीनी खाने की होती है इच्छा तो हो सकते हैं इस बीमारी का शिकार

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Mar 29, 2019 11:10 am IST,  Updated : Mar 29, 2019 11:10 am IST

पूरे दिन में आपको बार-बार चीनी खाने की इच्छा होती है तो ये आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। कई रिसर्च और डॉक्टर भी मानते है कि चीनी आपकी हेल्थ के लिए खतरनाक है।

चीनी खाने के नुकसान- India TV Hindi
चीनी खाने के नुकसान

नई दिल्ली: पूरे दिन में आपको बार-बार चीनी खाने की इच्छा होती है तो ये आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। कई रिसर्च और डॉक्टर भी मानते है कि चीनी आपकी हेल्थ के लिए खतरनाक है। मीठा खाने की इच्छा कई वजह से हो सकती है सबसे पहले तो अगर आप अपने खाने में कम प्रोटीन लेते हैं तो आपको बार-बार मीठा खाने की इच्छा हो सकती है।

चीनी को सफेद ज़हर कहा जाता है। जबकि गुड़ स्वास्थ्य के लिए अमृत है। क्योंकि गुड़ खाने के बाद वह शरीर में क्षार पैदा करता है जो हमारे पाचन को अच्छा बनाता है। दिन के अधिकतर समय बैठे रहने की जीवनशैली के अलावा मानसिक तनाव, अपर्याप्त नींद इन महामारियों के मुख्य कारण हैं और इसी वजह से नमक व चीनी की खपत भी बढ़ रही है। यह क्रिस्टलाइज़ सूक्रोज, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज का एक संयोजन का एक रूप है, जिसे गन्ने के रस से निकाला जाता है। चीनी के अधिक सेवन से कई प्रकार की समस्याएं हो सकती है। आपने सुना ही होगा कि चीनी का सेवन करने से दांत खराब हो जाते हैं। जब भी कभी हमारा मीठा या चीनी खाने का मन होता है तब हम चाय, कॉफी या केक के फॉम में अपनी शुगर क्रेविंग्स को खत्म कर लेते हैं।

शक्कर रक्तगत शर्करा को अतिशीघ्रता से बढाती हैं। इसे सात्म्य करने के लिए अग्नाशय की कोशिकाएं इन्सुलिन छोड़ती हैं। इन्सुलिन का सतत बढ़ती हुई मांग की पूर्ति करने से ये कोशिकाएँ निढाल हो जाती है, इससे इन्सुलिन का निर्माण कम होकर मधुमेह होता है।

चीनी का सेवन करने से चीनी हमारे खून में घुलने लगती है और यह कुछ ऐसे प्रोटीन के साथ मिल जाती है जो हमारी जवान त्वचा को एजिंग की तरफ ले जाते हैं। चीनी प्रोटीन को खराब करके कोलेजन और इलास्टिन को भी खराब कर देती है। जिसके कारण स्किन में ड्राइनेस और त्वचा पर झुरियां दिखाई देने लगती है।

शक्कर का सेवन और डिप्रेशन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। एक स्टडी में बताया गया ज़्यादा फ्रुक्टोज वाली चीज़ें खानेवाले युवाओं में कैंसर की संभावना अधिक देखी गयी। यह इस बात की ओर भी इशारा करता है कि चीनी डिप्रेशन से जुड़ी समसयाएं जैसे चिंता और तनाव को और बिगाड़ सकता है और दिमाग के काम करने के तरीके को बदल सकता है।

इन रिसर्च से ये बिल्कुल साफ़ नहीं है कि चीनी से दिल की बीमारी या डायबिटीज़ होती है। स्विटज़रलैंड की लुसान यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर ल्यूक टैपी कहते हैं कि मोटापे, दिल की बीमारी और डायबिटीज़ की बड़ी वजह है ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरी लेना। ज़रूरी नहीं कि ये कैलोरी आप चीनी के ज़रिए लें।

प्रोफ़ेसर ल्यूक कहते हैं कि, 'ख़र्च से ज़्यादा ईंधन शरीर में भरना आगे चल कर फैट के रूप में जमा हो जाता है। इससे इंसुलिन का असर कम हो जाता है। जिगर में वसा जमा हो जाती है। अगर आप जितनी कैलोरी खाते हैं, उतनी ही ख़र्च करें, तो चीनी या मीठी चीज़ें खाने में कोई हर्ज़ नहीं।'

वो खिलाड़ियों की मिसाल देते हैं, जो ज़्यादा शुगर लेते हैं। मगर उन्हें दिल की बीमारी नहीं होती। क्योंकि वो ज़्यादा कैलोरी को मेहनत कर के जला देते हैं।

कुल मिलाकर कहें तो, ज़्यादा मीठा खाने से डायबिटीज़, दिल की बीमारी, मोटापा या कैंसर होने के तर्कों में दम नहीं है। हां, ज़्यादा मीठा खाने से ये सब होता है। लेकिन, इसकी सीधी वजह मीठा खाना ही है, ये अभी पक्के तौर पर नहीं साबित हुआ है।

हमारी रोज़ाना की डाइट में पांच फ़ीसद से ज़्यादा चीनी नहीं होनी चाहिए। लेकिन, जानकार कहते हैं कि हर इंसान के लिए संतुलित आहार का पैमाना अलग होता है।

ब्रिटिश डायटिशियन रीनी मैक्ग्रेगर कहती हैं, 'मैं खिलाड़ियों के साथ काम कर चुकी हूं। उन्हें ज़्यादा कैलोरी यानी मीठे की ज़रूरत होती है। लेकिन वो वर्ज़िश से ज़्यादा कैलोरी को जला लेते हैं। जबकि वो तो गाइडलाइन से ज़्यादा चीनी ले रहे होते हैं।'

अब जो लोग खिलाड़ी नहीं हैं, उनके लिए चीनी को खान-पान का अहम हिस्सा बनाना ज़रूरी नहीं है। लेकिन उसे विलेन साबित करना भी ठीक नहीं।

रीनी मैक्ग्रेगर कहती हैं कि जब भी आप किसी चीज़ को न खाने का प्रण लेते हैं, तो आप को उसको खाने का और भी मन करता है। बेहतर हो कि बंदिशें न लगाएं। हां, मीठा खाने की तादाद पर क़ाबू रखें।

जेम्स मेडिसन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एलन लेविनोवित्ज़ एक और मज़ेदार थ्योरी लेकर आए हैं। वो कहते हैं कि इंसान ने ऐतिहासिक रूप से उस चीज़ को विलेन साबित करने की कोशिश की है, जिसके प्रति वो ज़्यादा आकर्षित होता है। वो विक्टोरियन युग की मिसाल देते हैं, जब यौन सुख को ख़राब बता कर उससे परहेज़ की सलाह ब्रिटेन के लोगों को दी जाती थी। लेविनोवित्ज़ कहते हैं कि आज चीनी के साथ यही हो रहा है। चूंकि हम मीठा खाने से पूरी तरह मुंह नहीं फेर पाते, तो, हम उसे विलेन साबित करने में लगे हैं।

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