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Mithun Sankranti 2026: मिथुन संक्रांति कब है? इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में करें ये शुभ काम, जानें डेट और महा पुण्यकाल समय

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jun 04, 2026 11:41 pm IST,  Updated : Jun 04, 2026 11:41 pm IST

Mithun Sankranti 2026 Date: मिथुन संक्रांति का पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। वर्ष 2026 में यह पर्व 15 जून को मनाया जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य पूजा, अर्घ्य और दान करने से शुभ फल मिलता है।

Mithun Sankranti 2026- India TV Hindi
मिथुन संक्रांति 2026 कब है Image Source : FILE IMAGE

Mithun Sankranti 2026 Date: वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है और उनका हर राशि परिवर्तन विशेष महत्व रखता है। जब सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, तब मिथुन संक्रांति मनाई जाती है। यह दिन सूर्य उपासना, स्नान, दान और पुण्य कर्मों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साल 2026 में मिथुन संक्रांति 15 जून को पड़ रही है। खास बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण होगा, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा।

कब होगा सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश?

वैदिक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 15 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी राशि परिवर्तन के साथ मिथुन संक्रांति का शुभ पर्व मनाया जाएगा। सनातन धर्म में सूर्य के गोचर को ऊर्जा, सफलता और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

मिथुन संक्रांति 2026 का पुण्यकाल

संक्रांति के दिन पुण्यकाल और महा पुण्यकाल का विशेष महत्व है। इस दौरान किए गए दान, जप और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

  • पुण्यकाल: दोपहर 12:59 बजे से शाम 7:20 बजे तक
  • महा पुण्यकाल: दोपहर 12:59 बजे से 3:19 बजे तक

बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग

मिथुन संक्रांति के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग रहेगा। यह योग सुबह 5:23 बजे से 7:08 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ और शुभ कर्मों के लिए लाभकारी माना गया है।

इस दिन जरूर करें सूर्य पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मिथुन संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद जल में लाल चंदन, अक्षत, कुमकुम और लाल पुष्प मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। मान्यता है कि इससे करियर और कारोबार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही रुके हुए कार्यों में गति मिलती है।

दान का महत्व

मिथुन संक्रांति पर चावल, गेहूं, गुड़ जैसी वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है। इसके अलावा छाता, सूती वस्त्र, चप्पल और पंखा दान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन इन चीजों का दान करने से किसी भी चीज की कमी नहीं होती। 

सूर्य देव की विशेष कृपा

सूर्य भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए मिथुन संक्रांति के दिन सूर्य मंत्रों का जप, आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य चालीसा का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे व्यक्ति को यश, सम्मान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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