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Chaitra Navratri 2021: नवरात्र के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानिए पूजा विधि, मंत्र और भोग

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Apr 14, 2021 06:39 pm IST,  Updated : Apr 14, 2021 11:54 pm IST

चैत्र तृतीया तिथि यानि चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा की तीसरी शक्ति मां चंद्रघंटा की उपासना की जायेगी। जानिए पूजा विधि और मंत्र।

Chaitra Navratri 2021: नवरात्र के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानिए पूजा विधि, मंत्र और भो- India TV Hindi
Chaitra Navratri 2021: नवरात्र के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानिए पूजा विधि, मंत्र और भोग  Image Source : INDIA TV

चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और गुरूवार का दिन है। तृतीया तिथि दोपहर 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जायेगी। चैत्र तृतीया तिथि यानि चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा की तीसरी शक्ति मां चंद्रघंटा की उपासना की जायेगी। 

देवी मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा, जिनका वाहन सिंह है। जिनके दस हाथों में से चार दाहिनी हाथों में कमल का फूल, धनुष, जप माला और तीर है और पांचवां हाथ अभय मुद्रा में रहता है, जबकि चार बाएं हाथों में त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार है और पांचवा हाथ वरद मुद्रा में रहता है, उनका स्वरूप भक्तों के लिए बड़ा ही कल्याणकारी है। ये सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिये तैयार रहती हैं। इनके घंटे की ध्वनि के आगे बड़े से बड़ा शत्रु भी नहीं टिक पाता है। लिहाजा देवी चंद्रघंटा हर परिस्थिति में सभी तरह के कष्टों से छुटकारा दिलाने में सहायक है। 

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नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के मंत्र का जप किया जाये तो सभी परेशानियों के साथ ही साधक को शुक्र ग्रह से संबंधी परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है। क्योंकि शुक्र ग्रह पर मां चंद्रघंटा का आधिपत्य रहता है। लिहाजा आज आपको मां चंद्रघंटा के मंत्र का जप अवश्य करना चाहिए। मंत्र है।

पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

इस मंत्र का 11 बार जप करने से आपको शुक्र संबंधी परेशानियों के साथ ही जीवन में अन्य परेशानियों से भी छुटकारा मिलेगा।

मां चंद्रघंटा का भोग
कन्याओं को खीर, हलवा या स्वादिष्ट मिठाई भेट करने से माता प्रसन्न होती है | आज माता चंद्रघंटा को प्रसाद के रूप में गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाने से जातक को सभी बिघ्न बाधाओं से मुक्ति मिलाती है|

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मां चंद्रघंटा की पूजा विधि

माता की चौकी (बाजोट) पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसकेबाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी,  तांबे या मिट्टीके घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारामां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमेंआवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

ध्यान
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

स्तोत्र पाठ
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्

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